बरेली: अनलॉक-5 में खुली जिला अस्पताल की ओपीडी, उमड़ने लगी भीड़
बरेली,अमृत विचार। कोरोना काल में बंद पड़ी जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल की ओपीडी शासन के निर्देश पर खोल दी गई है। आपीडी खुलने के साथ ही मरीजों की भीड़ भी उमड़ने लगी है। जिला अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था पटरी पर लौट आई है। बुधवार को पर्चा बनवाने वालों की कतार लगी रही। विभिन्न …
बरेली,अमृत विचार। कोरोना काल में बंद पड़ी जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल की ओपीडी शासन के निर्देश पर खोल दी गई है। आपीडी खुलने के साथ ही मरीजों की भीड़ भी उमड़ने लगी है। जिला अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था पटरी पर लौट आई है। बुधवार को पर्चा बनवाने वालों की कतार लगी रही। विभिन्न विभागों में करीब 721 मरीजों ने इलाज कराया। सर्दी, जुकाम, बुखार, पेट-दर्द , आंख, दांत आदि के मरीज ओपीडी कराने अस्पताल पहुंचे।
सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो रहा पालन
भले ही जिला अस्पताल परिसर में निरंतर लाउडस्पीकर से लोगों को कोविड-19 के नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा हो लेकिन इसका असर अस्पताल में नहीं दिखाई दे रहा है। ओपीडी में चिकित्सकों के कक्ष के आगे मरीजों की कतारें तो लगी रहीं लेकिन वहां न तो उन्हें कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने वाला मौजूद था और न ही मरीजों को इसकी कोई फिक्र थी।
दिन में गर्मी और रात में सर्दी से बढ़ रहे मरीज
बदलता मौसम अब लोगों को बीमार बना रहा है। दिन में तेज धूप तो शाम होते ही तापमान भी लुढ़क जाता है। रोज घट-बढ़ रहे तापमान का सबसे अधिक असर सेहत पर पड़ रहा है। सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। वहीं, फास्ड फूड का सेवन भी बीमार कर रहा है। शहर में धूल और धुएं के कारण अस्थमा के रोगी बढ़ रहे हैं। अनियमित दिनचर्या बीमार बना रही है। मौसम की चाल सेहत बिगाड़ सकती है। दिन और रात के तापमान में भारी अंतर बीमारियों की वजह बन रहा है। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। सर्दी, जुकाम, बुखार ने तो घर-घर दस्तक दे रखी है। चिकित्सक इस मौसम में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
“छाती में दर्द से परेशान हूं। सुबह अस्पताल आया था। जैसे-तैसे पर्चा बनवाया। चिकित्सक के कक्ष पर एक घंटे से अधिक समय हो गया खड़े-खड़े नंबर नहीं आने पर यहां लेट गए हैं।” -सतरासी, निवासी आलमपुरकोट
“चिकित्सक कक्ष के सामने खड़े-खड़े करीब डेढ़ घंटे से भी अधिक का समय हो गया है। कक्ष में चिकित्सक ही नदारद हैं। पूछने पर पता चला है कि वह किसी इमरजेंसी केस में गए हैं।” -वीरेंद्र कुमार, निवासी जाटवपुरा
“ओपीडी खुलने के बाद अब ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ओपीडी में कभी कुछ समय के लिए कोई चिकित्सक नहीं है तो हो सकता है कि वह विभाग के किसी अन्य कार्य से कहीं अस्पताल परिसर में गया हो। चिकित्सक निरंतर और समय से ओपीडी में बैठ रहे हैं। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जायेगा।” -डा. हर्षवर्धन, सीएमएस जिला अस्पताल
