Kannauj: निलंबन के बाद पहली बार सामने आए शिकायतकर्ता अनुराग सिंह; यूटा ने दिया खुला समर्थन, कहा- 'आगे तक लड़ी जाएगी लड़ाई'
कन्नौज, अमृत विचार। एंटी करप्शन टीम से झूठी शिकायत करने के आरोप में निलंबित हो चुके गुगरापुर ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गौरीबांगर के शिक्षक अनुराग सिंह पहली बार सामने आए हैं। उन्होंने कहा है कि वीडियो में दिखने वाले दूसरे व्यक्ति से उनका कोई सरोकार नहीं है। न ही वह उसे पहचानते हैं। उन्होंने वरिष्ठ लिपिक विमल पांडेय के पैर छूकर रुपये दिए थे। दूसरी ओर यूनाइटेड टीचर्स ऑफ एसोसिएशन (यूटा) ने अनुराग सिंह को खुला समर्थन देने का दावा किया है। साथ ही आगे भी लड़ाई जारी रखने को कहा।
रविवार को पाल चौराहा के निकट एक होटल में यूटा व निलंबित हो चुके शिक्षक अनुराग सिंह ने पत्रकारों को बुलाकर अपना पक्ष रखा और सफाई दी। अनुराग सिंह ने कहा कि वीडियो फुटेज में दिखने वाले अन्य व्यक्ति को वह नहीं जानते हैं। वह पांडेय से शायद किसी स्कूल की मान्यता को लेकर आया था। उसी ने मारपीट की है।
अनुराग सिंह का आरोप है कि उससे एरियर निकालने के लिए 20 हजार रुपये की बात हुई थी। बेसिक शिक्षा विभाग में 10 फीसदी रुपये एरियर निकालने के लिए लिया जाता है। एंटी करप्शन की टीम बाहर थी, इसलिए उसे डर था और घबड़ाहट हो रही थी। इस वजह से पीछे खड़ा रहा। 10 हजार रुपये वह पहले दे चुका था।
साथ खड़े दूसरे व्यक्ति की कोई कहासुनी थी। उस दिन मीटिंग थी कई शिक्षक आए थे किसी ने व्यक्तिगत दुश्मनी निकाली है मारपीट में वह शामिल नहीं हैं। अनुराग का कहना है कि 27 अक्टूबर 2023 को उसका एक्सीडेंट हुआ था और कानपुर रेफर किया गया। पत्नी की भी तबियत खराब हो गई। रुपये से वह लाचार था। उस दौरान ससुराल पक्ष ने आर्थिक सहयोग किया था।
यूटा जिलाध्यक्ष बोले, करीब 600 शिक्षकों का अटका एरियर
यूटा जिलाध्यक्ष पंकज सिंह भदौरिया ने कहा है कि उनका संगठन पंजीकृत है। मान्यता के लिए सभी 75 जिलों में संगठन व कुछ मानक और होना चाहिए लेकिन पंजीकृत संगठन किसी की बात उठा सकता है। उन्होंने कहा कि 29 फरवरी वाले मामले में उन्नाव के एक शिक्षक की संलिप्तता बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि वह यूटा का पदाधिकारी है। जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि उनका संगठन उन्नाव में नहीं है। प्रसारित हो रहे वीडियो व सीसीटीवी फुटेज पर कहा कि जो संदिग्ध लोग दिखाई दे रहे हैं उसे एक एप के जरिए एडिट किया गया है।
यूटा हमेशा भ्रष्टाचार के विरोध में काम करता है। मुखर होने की वजह से ही अधिकारी नाराज हो जाते हैं। आगरा या कोई अन्य जनपद का कोई शिक्षक उस दिन नहीं था। जिलाध्यक्ष ने कहा कि तीन बीईओ ने शिक्षक अनुराग सिंह के कागज सत्यापित किए हैं। बीएसए ने जो पत्र जारी किया है उसमें एरियर के मामले में 11वें नंबर पर नाम भी है। पंकज सिंह ने आरोप लगाया है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में करीब 1500 अध्यापक आए थे, उसमें करीब 600 को अब तक एरियर नहीं मिला है। उनके पास 22 शिक्षकों की सूची है और जिसमें 12 पात्र हैं व सत्यापन आ गया है। एक साल बाद भी एरियर नहीं निकाला गया। सत्यापन की आख्या गोपनीय होती है। शिक्षक को पता नहीं होता है। उन्होंने का कहा कि जब पीड़ित की सुनी नहीं जाती है तब वह किसी एजेंसी या एंटी करप्शन टीम के पास पहुंचता है।
संरक्षक का दावा, दो-तीन साल बाद भी नहीं हो सका सत्यापन
यूटा के संरक्षक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि 16 जून 2023 के आदेश में बीएसए ने सत्यापन का आदेश जारी किया है। उस दौरान गुगरापुर में पटल का चार्ज विमल पांडेय के पास है। कई लोग ऐसे हैं जिनके पति नहीं रहे। पत्नी को नौकरी मिली दो बच्चे हैं लेकिन वेतन नहीं मिल रहा है। जब शिक्षक परेशान हो जाते हैं तब एंटी करप्शन से शिकायत करते हैं। यूटा खुले मंच पर शिक्षकों के हित में लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक संगठन बाबू के पक्ष में खड़े हैं वह बताएं कि शिक्षक संघ चला रहे हैं या बाबू का संघ है।
यूटा संरक्षक ने आरोप लगाया कि दलाली करने वाले लोग बीएसए कार्यालय में संबद्ध हैं वह एरियर के सत्यापन के लिए ही रखे गए हैं। भर्ती होने के दो-तीन साल बाद भी शिक्षकों का सत्यापन नहीं हो सका है यह बड़े ही शर्म की बात है। तत्कालीन बीएसए ने 10 शिक्षकों को सत्यापन के लिए लगाया है जबकि नियम मुताबिक शिक्षक को संबद्ध नहीं किया जा सकता है। संरक्षक का कहना है कि कर्मचारी मिलकर सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं। बीएसए जिले में नई हैं व पहली तैनाती है इसलिए बाबू उनको गुमराह कर रहे हैं। उनको सच्चाई से अवगत नहीं करा रहे हैं। शिक्षकों को न्याय के लिए जहां जाना पड़ेगा वह जाएंगे।
