बरेली: शिक्षकों और कर्मचारियों की मेहनत से मिली सौ करोड़ की ग्रांट, लेकिन प्रोन्नति की फाइल दबाई
कुलसचिव के नाम एक और पत्र सोमवार को सभी विभागों में पहुंचा
बरेली,अमृत विचार। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव की जंग के बीच एक और पत्र सोमवार को सभी विभागों में सार्वजनिक हो गया। इस पत्र में कुलपति प्रो. केपी सिंह ने शिक्षकों और कर्मचारियों की फाइल आठ महीने से दबाने के लिए कुलसचिव अजय कृष्ण यादव को जिम्मेदार बताया गया है, जबकि शिक्षकों और कर्मचारियों की मेहनत से ही ए डबल प्लस ग्रेड और सौ करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। कुलपति ने एक महीने में कार्यवाही न करने पर कुलसचिव के विरुद्ध कार्यवाही की बात कही है। इस पत्र को भी राज्यपाल और शासन को भेजा गया है।
सबसे पहले जारी पत्र में कुलपति ने उनकी बिना अनुमति के जारी किए गए कुलसचिव के सभी आदेश निरस्त किए। उसके बाद प्रोन्नत शिक्षकों के वेतन निर्धारण न करने और फिर नगर निगम का टैक्स निर्धारण में लापरवाही के लिए कुलसचिव को जिम्मेदार बताया। अब 6 मार्च को कुलसचिव के नाम जारी कुलपति के पत्र के मुताबिक विश्वविद्यालय के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी दिन-रात मेहनत, लगन और निष्ठा से काम करते हैं। इसकी वजह से ही विश्वविद्यालय को नैक में ए डबल प्लस ग्रेड मिली और पीएम उषा के तहत सौ करोड़ रुपये की ग्रांट प्राप्त हुई। विश्वविद्यालय को शिक्षकों और कर्मचारियों का कैरियर एडवांस स्कीम के तहत समय पर प्रोन्नति करनी चाहिए।
शिक्षकों और कर्मचारियों के अनुरोध पर उन्होंने कई बार पत्र लिखे लेकिन प्रोन्नति नहीं हुई। विश्वविद्यालय एनआईआरएफ और क्यूएस रैंकिंग में प्रतिभाग करने के लिए प्रयासरत है। रैंकिंग संस्थाएं प्रोन्नति का भी परीक्षण करती हैं। इस संबंध में शासन और राज्यपाल के भी निर्देश हैं लेकिन खेद है कि आठ महीने से अधिक समय के बाद भी एक भी प्रोन्नति प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। उन्होंने निर्देश दिए कि एक महीने में जिन शिक्षकों और कर्मचारियों की प्रोन्नति देय, उन सभी की पत्रावलियां पूर्ण कर तत्काल उनके कार्यालय में प्रेषित करें। इन निर्देशों का कड़ाई से पालन नहीं करने पर विधि संगत कार्यवाही करने के लिए विश्वविद्यालय बाध्य होगा।
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