बकाया भुगतान के लिए मंदिरों द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाना दुखद :हाई कोर्ट 

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ठाकुर रंगी जी महाराज विराजमान मंदिर, वृंदावन और आठ अन्य मंदिरों की पिछले 4 वर्षों से रोकी गई अनन्युटी (वार्षिकी) के मामले में आयुक्त/ सचिव, राजस्व बोर्ड उत्तर प्रदेश को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा कि यह चिंता का विषय है की मंदिरों और ट्रस्टों को राज्य सरकार से अपना बकाया जारी करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जो कि राज्य के खजाने से स्वचालित रूप से मंदिर के खाते में प्रवाहित होना चाहिए था। यह एक वार्षिक सुविधा है और संबंधित अधिकारी को मंदिर की वार्षिकी जारी करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए थी। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। इसके अलावा कोर्ट ने उचित कार्रवाई के लिए मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखने का भी निर्देश दिया है। 

याचिका के अनुसार ठाकुर रंगी जी महाराज विराजमान मंदिर, वृंदावन के साथ अन्य मंदिरों ने अपनी अनन्युटी जारी करने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसे जिला मजिस्ट्रेट, मथुरा एवं वरिष्ठ कोषाधिकारी ने विगत 4 वर्षों से रोक रखा था। उक्त व्यवस्था उत्तर प्रदेश जमीदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम,1950 की धारा 99 के तहत जनवरी 2020 से दिसंबर 2023 तक के लिए निर्धारित किया गया था। मालूम हो कि पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने आयुक्त/सचिव राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया था कि वह अनन्युटी जारी करने की अनुमति न देने के कारण को बताते हुए अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें। कोर्ट को हलफनामा के माध्यम से जो कारण बताए गए वे धन की कमी थे। 

कोर्ट ने याचिका पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा लखनऊ में विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा गया पत्र इस बात का सूचक है कि लखनऊ में बैठे अधिकारी को ट्रस्टों और मंदिरों की अनन्युटी (वार्षिकी) जारी करने की कोई परवाह नहीं है। इसके अलावा सरकार से आवश्यक बजट स्वीकृत करने के लिए भी कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। मुकदमे की अगली सुनवाई आगामी 20 मार्च को सुनिश्चित की गई है।

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