पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, कोर्ट ने खारिज की याचिका
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण के मामले में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को कोई राहत न देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। मामले के अनुसार 6 दिसंबर 2001 को धर्मराज मद्धेशिया नाम के व्यक्ति द्वारा कुछ अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध आईपीसी की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 की धारा 3 (1) के तहत पुलिस स्टेशन कोतवाली, बस्ती में प्राथमिक की दर्ज कराई गई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसके बेटे राहुल मद्धेशिया का स्कूल जाते समय अपहरण कर लिया गया था।
विरोध करने पर शिकायतकर्ता के साथ मारपीट भी की गई। हालांकि याची की ओर से बचाव के तर्क दिए गए लेकिन कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि 'गिरोह' द्वारा किया गया एक भी अपराध गैंगस्टर लगाने के लिए पर्याप्त है। अतः याचिका खारिज कर दी गई। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते पारित किया है।
मालूम हो कि बुधवार को फैसला सुरक्षित करते हुए कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि वर्तमान मामले में याची ने अपना आपराधिक इतिहास का उल्लेख नहीं किया है, जबकि उसका एक लंबा आपराधिक इतिहास है। इसके अलावा कोर्ट ने पूर्व में पारित अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट को पूरी आर्डर शीट एक सील बंद लिफाफे में भेजने का निर्देश दिया था।
कोर्ट के आदेश के अनुपालन में ट्रायल कोर्ट द्वारा भेजी गई 17 दिसंबर 2022 से 29 फरवरी 2024 तक चलने वाले पूरे मामले की आर्डर शीट को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया, साथ ही सरकारी अधिवक्ता ने प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली बस्ती द्वारा याची के खिलाफ 36 आपराधिक मुकदमों की सूची प्रस्तुत की। याचिका में स्पेशल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। याची का कहना है कि वह मूल केस अपहरण मामले में जमानत पर है। मूल केस के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के मामले में स्पेशल कोर्ट ने गलत तरीके से एनबीब्ल्यू जारी किया है।
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