सुलतानपुर: वकीलों की हड़ताल स्थगित, सोमवार से होगा काम, जानें पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई 16 को, अधिवक्ता संघ भी हाईकोर्ट में सोमवार को दाखिल करेगा रिट पिटीशन

सुलतानपुर, अमृत विचार। कादीपुर में दो थानों का क्षेत्राधिकार स्थानांतरण आदेश रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने याची को शपथ पत्र दाखिल करने तथा सरकार से जवाब तलब कर मामले को फ्रेश केस की तरह सूचीबद्ध करते हुए 16 अप्रैल को सुनवाई का निर्देश दिया है।

अधिवक्ता अरविंद सिंह राजा ने सुनवाई के दौरान सीजेएम के हाइकोर्ट के आदेश पर ट्रांसफर की जनसूचना अधिकार के तहत मांगपत्र पर कागजात न दिए जाने की बात उठाई। कहा जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत अभी तक उस आदेश की कापी सीजेएम ने नहीं दी  है जिस पर हाइकोर्ट ने याची को एफिडेविड दाखिल करने का निर्देश देते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। हाइकोर्ट ने अगले सप्ताह पुनः एक फ्रेश केस की तरह सूचीबद्ध करने का निर्देश देते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। 

बताते चले सीजेएम बटेश्वर कुमार ने विगत 11 मार्च को हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दीवानी न्यायालय से कादीपुर व अखंडनगर से संबंधित मुकदमे को सुनवाई के लिए कादीपुर स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।  

तभी से जिले के वकील सीजेएम के आदेश के विरोध में न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। वहीं जिला जज से बार सचिव आर्तमणि मिश्र ने आरटीआई के तहत सूचना मांगी है। उन्होंने जन सूचना के तहत जिला जज/जन सूचना अधिकारी जेपी  पांडेय से मांग की है कि सीजेएम ने हाईकोर्ट के जिस आदेश का संदर्भ देते हुए दो थाना ट्रांसफर किया हैं, उसे दिलाया जाए। थाना ट्रांसफर करने के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी है। 

दीवानी न्यायालय स्थित अधिवक्ता संघ भवन में शनिवार को पूर्व निर्णय के अनुसार बार एसोसिएशन अध्यक्ष अरविंद पांडेय व महासचिव आर्तमणि मिश्र ने बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की। बार अध्यक्ष ने बताया ज्यूडिशरी ट्रांसफर के मुद्दे पर हाईकोर्ट में संघ की तरफ से रिट याचिका सोमवार को दाखिल की जायेगी। याचिका दाखिल होने के बाद बार एसोसिएशन सुलतानपुर आवश्यकतानुसार साधारण सभा की बैठक बुलाकर सदन को जानकारी देगा। तब तक हड़ताल स्थगित रहेगी।

सोमवार से अधिवक्ता काम करेंगे। शनिवार को भी हड़ताल के कारण न्यायिक कामकाज ठप रहा। मुकदमों की पैरवी करने आये वादकारियों को मायूस होकर लौटना पड़ा। फिलहाल वकीलों की हड़ताल खत्म होने से वादकारी खुश दिखे तथा संघ के निर्णय की प्रशंसा की। 

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