बरेली: कुतुबखाना मंडी में बिना शासनादेश के खुल गईं सात दुकानें, एक साल से थीं बंद 

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दो बार बोर्ड बैठक में आया प्रस्ताव

बरेली, अमृत विचार। कुतुबखाना सब्जी मंडी की जिन सात दुकानों का मामला नीति नहीं होने की बात कहकर शासन को भेजा गया, उन्हीं दुकानों को बिना शासन के आदेश पर प्रीमियम, किराया और जुर्माना लेकर खोल दिया गया। एक दुकान से एक लाख रुपये प्रीमियम, 25 हजार किराया और 10 हजार जुर्माना वसूला गया है।

कुतुबखाना सब्जी मंडी में सात दुकानें ऐसी चल रही थीं जो नगर निगम के डिमांड रजिस्टर पर किसी के नाम दर्ज नहीं थी। यानी नगर निगम की जमीन पर पहले के अफसरों ने दुकानदारों को काबिज करा दिया था। पिछले साल नगर आयुक्त ने सख्ती दिखाई तो अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने इन दुकानों को सील कर दिया था। उसके बाद 23 अगस्त 2023 को इन दुकानों के मामले को सदन में रखकर इन्हें खुलवाने का प्रस्ताव पास किया गया। सदन ने ऐसे मामले को पास किया गया जिसकी कोई नीति नहीं थी। इस पर नगर आयुक्त ने इस प्रकरण को शासन को भेजकर वहां से दिशा निर्देश मांगे थे। इस प्रस्ताव के दो कार्यवृत्त भी जारी कर दिये गये थे। इसके बाद 28 फरवरी को बोर्ड बैठक में यही प्रस्ताव फिर लाया गया।

सूत्रों ने बताया कि नियम है कि कोई प्रस्ताव सदन में पास किया है उसे रद किये बिना दूसरा प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है। साथ ही कार्यकारिणी के सामने लाए बिना ही सीधे बोर्ड बैठक में कुतुबखाना सब्जी मंडी की दुकानों को खोलने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। दुकानों को खोलने के लिए ऑनलाइन प्रीमियम जुर्माना और किराया जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च ही तय की गई थी। जानकारों का कहना है कि सदन से पास कई विवादित मामले दिशा निर्देश लेने के लिए ही शासन को भेजे जाते हैं। वहां से नीति निर्धारण के बाद मामला तय होता है।

कुतुबखाना सब्जी मंडी की दुकानों को खोलने के लिए कमेटी बनी थी। उसने पॉलिसी बनाई। सदन से मामला पास किया गया था। इसलिए दुकानों का प्रीमियम लेकर बंद दुकानों को खाेला गया है -एसके सिंह, अपर नगर आयुक्त द्वितीय।

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