Kanpur: बिगड़ी जीवनशैली का महिलाओं में पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव...बढ़ रहा सीजेरियन प्रसव
कानपुर, अमृत विचार। अनियमित दिनचर्या और खानपान सही नहीं होने की वजह से लोगों को कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सबसे अधिक समस्या महिलाओं को गर्भावस्था के समय होती है। प्रसव के समय या उससे पहले होने वाले असहनीय दर्द को वह सहन नहीं कर पाती, जिस वजह से वह सीजेरियन प्रसव कराती है, ऐसे में आहार, विहार, विचार, योग और गर्भ संवाद की मदद से गर्भवती को सामान्य प्रसव संभव हो सकता है।
बिगड़ी जीवनशैली, गलत खानपान व आरामदायक जीवनशैली की वजह से सबसे अधिक युवतियों व महिलाओं के शरीर पर असर पड़ रहा है, जिस कारण उनमें गर्भावस्था व प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को सहन करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके अलावा पहले के मुताबिक अब गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को परिवारिक व मानिसक सपोर्ट भी इतना अधिक प्राप्त नहीं होता, जिस कारण उनको दिक्कतों का सामना करना पड़ जाता है और वह सीजेरियन प्रसव करातीं हैं।
लेकिन हर तकनीक के अच्छे व खराब दोनों पहलू होते है। बढ़ रहे सीजेरियन प्रसव की संख्या कम करने और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. सीमा द्विवेदी ने टीम के साथ बीते तीन वर्षों में 36 कार्यशालाएं आयोजित की, जिनमें उनको कुछ संस्थाओं व वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी सहयोग किया। डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि तीन वर्षों में पांच सौ महिलाओं को आहार, विहार, विचार, योग व गर्भ संवाद की जानकारी दी। उसके बाद सभी की केस स्टडी भी की गई। नतीजा यह निकाला कि 80 प्रतिशत महिलाओं का प्रसव सामान्य हुआ।
आहार : युवतियों व महिलाओं को फास्ट फूड व जंक फूड से परहेज करना चाहिए। खासकर गर्भावस्था के समय। इनकी जगह को गर्भवती को मोटे आनाज, हरी सब्जियों, मौसमी फल, आयरन, कैल्शियम युक्त चीजों का सेवन करना चाहिए।
योग : योग में गर्भवती को तितली आसन, मल आसन व चेयर असान जरूर करना चाहिए। क्योंकि इन आसन की वजह से गर्भवतियों को प्रसव के समय होने दर्द से काफी राहत मिलती है। शरीर स्टेच्यूवल बना रहता है।
विहार : विहार में आसपास के वातावरण को अच्छा रखना चाहिए। गर्भवती के लिए गर्भावस्था के समय खुश मिजाज महौल बनाकर रखना चाहिए। जिसका असर गर्भवती व गर्भ में मौजूद बच्चे की मानसिक व शरीरिक स्थिति पर होता है।
विचार : गर्भावस्था के दौरान मां व परिवार के सदस्यों के विचार को शुद्ध रखना चाहिए। आसपास का माहौल तनाव युक्त बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। न ही गर्भवती के सामने या गर्भवती से लड़ाई-झगड़ा करना चाहिए, जिससे दिक्कत हो।
गर्भ संवाद : गर्भ में मौजूद बच्चे से मां या परिवारिक सदस्यों का संवाद भी बेहद जरूरी है। क्योंक बच्चा गर्भ में पांच हजार शब्द सीखता है। इसलिए बच्चे से बातें करनी चाहिए। गर्भवास्था के समय अच्छी व जानकारी युक्त किताबें पढ़नी चाहिए।
