लखनऊ: एसिडिटी और कब्ज को करता है दूर, डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण है सत्तू

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वीरेंद्र पांडेय/लखनऊ, अमृत विचार। चने और जौ को भूनकर एक साथ पीसकर सत्तू बनाया जाता है। इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए सत्तू को हमेशा घोलकर पीना ज्यादा बेहतर होता है। यदि घोलकर नहीं पी रहे हैं, तो भी सत्तू खाने के बाद पानी खूब पीना चाहिए।

ऐसा करने से कब्ज की शिकायत नहीं होती। इसके अलावा सत्तू पीने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती। जिसके चलते यह डायबिटीज के रोगियों के लिए रामबाण खाद्य पदार्थ है। यह जानकारी डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टर एसके पांडेय ने दी है।

डॉ एसके पांडे ने बताया कि सत्तू शरीर को ठंडा रखता है। इसके पीछे की वजह यह है कि जब आप सत्तू में पानी डालते हैं तो वह पानी को सोखता बहुत है, यानी को अवशोषित कर लेता है और जब पेट में जाता है, तो आतों में पानी रिलीज करता है। जिसकी वजह से शरीर को ठंडा करने में या काफी सहायक होता है,साथ ही पानी की कमी भी नहीं होती। 

उन्होंने बताया कि सत्तू खोलकर पीने से ज्यादा असरकारी होता है। यदि सत्तू आटे की तरह गूंथ कर खाएंगे और पानी कम मात्रा में पिएंगे, तो यह कब्ज खत्म करने के बजाय कब्ज बनने का काम भी करेगा। इसलिए हमेशा अधिक पानी के साथ सत्तू का सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से पेट की बीमारियां नहीं होती।

सेवन के समय मात्रा का रखे ध्यान

गर्मियों की शुरुआत से सत्तू का सेवन करना अच्छा होता है, लेकिन बारिश होने के बाद इसका प्रयोग कम मात्रा में करना चाहिए। गर्मियों में भी सत्तू का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक गिलास सत्तू पीना पर्याप्त है। यह लू से भी सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने से एसिडिटी की दिक्कत भी हो सकती है।

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