पशुधन घोटाला: निलंबित डीआईजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
लखनऊ, अमृत विचार। पशुपालन विभाग में हुए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में फंसे निलंबित डीआईजी अरविन्द सेन की अग्रिम जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश, पीसी एक्ट संदीप गुप्ता ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने से इंकार के बाद उन्होंने अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी। …
लखनऊ, अमृत विचार। पशुपालन विभाग में हुए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में फंसे निलंबित डीआईजी अरविन्द सेन की अग्रिम जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश, पीसी एक्ट संदीप गुप्ता ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने से इंकार के बाद उन्होंने अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुख्य अभियुक्त आशीष राय ने बयान दिया कि मामले को निपटाने के लिए अभियुक्त अरविंद सेन को पैसे दिए गए थे। वहीं अभियुक्त द्वारा संचालित बैंक अकाउंट में जो धनराशि मुंबई से अंतरित की गई है, वह आशीष राय के बयान से मेल खाती है। इसका अभियुक्त की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण भी नहीं दिया जा सका है। जिससे अभियुक्त की वर्तमान मामले में संलिप्तता व षणयंत्र में भूमिका को मजबूती प्रदान करती है।
कोर्ट ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है व आर्थिक अपराध से संबंधित है। मामले के तथ्यों व परिस्थितियों तथा प्रथम दृष्टया अभियुक्त की भूमिका को दृष्टिगत रखते हुए, उसे अग्रिम जमानत प्रदान करने का कोई औचित्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस फर्जीवाड़े की जांच में ही एसटीएफ ने शासन को डीआईजी पीएसी आगरा में तैनात अरविन्द सेन और डीआईजी रुल्स एंड मैनुअल पर तैनात रहे दिनेश चन्द्र दुबे के निलंबन की सिफारिश की थी।
एसटीएफ ने पत्र में लिखा था कि अरविन्द सेन ने पशुपालन फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी आशीष राय व एके राजीव के कहने पर सिपाही दिलबहार यादव से पीड़ित मंजीत को सीबीसीआईडी के दफ्तर में बुलाकर धमकाया था। तब अरविन्द सीबीसीआईडी में एसपी थे। इस जांच के दौरान ही अन्य ठेकों में दिनेश चन्द्र दुबे की संलिप्तता उजागर हुई थी। शासन ने दोनों अफसरों को 24 अगस्त को निलम्बित कर दिया था। इस बीच ही एसीपी गोमतीनगर श्वेता श्रीवास्तव ने इस फर्जीवाड़े की जांच तेज करते हुए 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। इसमें अब तक 12 लोग जेल जा चुके हैं।
