बरेली: दिल कमजोर, हौसला मजबूत और हार गया कोरोना
शिवांग पांडेय, बरेली। बीमारियों ने भले ही दिल को कमजोर कर दिया है लेकिन भरोसा उनका मजबूत है। इसी के बूते उन्होंने कोरोना वायरस को भी मात दे दी है। पांच महीने में संक्रमण की चपेट में आए 478 हृदय रोगी कोरोना संक्रमण को हराकर घर वापस जा चुके हैं। वे भरपूर एहतियात बरत रहे …
शिवांग पांडेय, बरेली। बीमारियों ने भले ही दिल को कमजोर कर दिया है लेकिन भरोसा उनका मजबूत है। इसी के बूते उन्होंने कोरोना वायरस को भी मात दे दी है। पांच महीने में संक्रमण की चपेट में आए 478 हृदय रोगी कोरोना संक्रमण को हराकर घर वापस जा चुके हैं। वे भरपूर एहतियात बरत रहे है और ह्रदय रोग की नियमित दवाएं भी ले रहे हैं।
चिकित्सक बताते हैं कि हृदय, मधुमेह और अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस वजह से संक्रमण उन्हें जल्द गिरफ्त में ले लेता है।
डरे नहीं डटकर करें सामना
चिकित्सकों का कहना है कि संक्रमण के डर को दिमाग पर हावी न होने दें। पांच महीने में 34 लोग ऐसे भी थे जो हृदय संबंधी बीमारियों से घिरे थे। संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती किए गए। इलाज के दौरान हार्ट अटैक होने के चलते उनकी मौत हो गई। दुर्गा नगर निवासी 18 वर्षीय युवक में भी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उसकी हालत बिगड़ती गई, कई बार जांच कराने पर पता चला कि वह हृदय रोग से ग्रस्त हैं। दस दिन के उपचार के बाद उसकी मौत हो गई।
75 वर्षीय वृद्ध ने भी नहीं मानी हार
सुभाष नगर निवासी 75 वर्षीय कैलाश चन्द्र हृदय रोगी हैं। बीते दिनों कोरोना संक्रमित पाए गए थे। उन्हें कोविड एल-3 अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तबीयत ठीक होने पर कुछ दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिजनों के पास जाकर कैलाश ने कहा कि कोरोना से हार जाते तो आपसे दोबारा कैसे मिल पाते। उन्होंने बताया कि नियमित खान-पान व दवा लेकर उन्होंने कोरोना को मात दी।
दिमाग में है मजबूती इसलिए कमजोर दिल भी दे रहा साथ
किला निवासी देवेंद्र कुमार को भी हृदय संबंधी बीमारी है। बुखार आने पर जांच कराई तो संक्रमित निकले। उन्हें कोविड एल -2 अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ दिन बाद रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें घर भेज दिया गया। देवेन्द्र ने बताया कि अस्पताल में हृदय रोग की दवाओं के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवाएं भी दी जाती थीं। उनके अनुसार, दिमाग में मजबूती है इसलिए कमजोर दिल भी साथ दे रहा है।
”कोरोना संक्रमित को यदि अन्य बीमारियों के बारे में मालूम है तो बचाव के बेहतर प्रयास किए जा सकते हैं। साथ ही मरीजों का मानसिक रूप से मजबूत होना भी जरूरी है। वे डटे रहेंगे तो कोरोना को मात दी जा सकती है।”—डा. अशोक कुमार, एसीएमओ
