Bareilly news: 10 वर्ष से नई ट्रेनें चलने का इंतजार कर रहा बरेली जंक्शन
सप्ताहिक ट्रेनों के फेरे बढ़ाने के लिए भी पर्याप्त नहीं संसाधन
मोनिस खान/बरेली,अमृत विचार : बरेली जंक्शन मुरादाबाद रेल मंडल का प्रमुख स्टेशन है, लेकिन आज भी यहां से चलने वाली ट्रेनों की संख्या कम ही है। दस साल में जंक्शन से एक भी नई नियमित ट्रेन का संचालन नहीं किया गया है। आखिरी बार अक्टूबर 2014 में नई ट्रेन के रूप में उज्जैन के लिए महाकाल एक्सप्रेस को चलाया गया था। जहां पहले 12 ट्रेनें बरेली जंक्शन से ओरिजनेट होती थीं, वहीं अब घटकर 11 रह गई हैं। नई ट्रेनों के नहीं चलने के पीछे संसाधनों की कमी को वजह माना जाता है।
जंक्शन के अधिकारी दबी जुबान से बताते हैं कि जिन ट्रेनों का संचालन बरेली जंक्शन से होता है, उसके अतिरिक्त मेंटिनेंस कराने के लिए उनके पास स्लॉट ही खाली नहीं हैं। जंक्शन से दो ट्रेनों का संचालन सप्ताह में एक-एक बार ही किया जाता है। जिसमें बुधवार को महाकाल एक्सप्रेस और शनिवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस चलाई जाती है, लेकिन स्थिति यह है कि सप्ताह में पांच दिन तो आराम से काम हो जाता है लेकिन इन ट्रेनों को चलाने में हाथ पांव फूल जाते हैं। सबसे बड़ी चुनौती वाशिंग लाइन में इनको समय से पहुंचाना है।
इसके लिए जरूरी है कि वाशिंग लाइन की संख्या को बढ़ाया जाए। दिक्कत तब बढ़ जाती है जब दूसरे स्टेशन की ट्रेनों का मेंटिनेंस भी बरेली जंक्शन पर दे दिया जाता है। इन दिनों समर सीजन के बढ़ते ट्रैफिक के कारण दिल्ली बरेली पैसेंजर का मेंटिनेंस यहां किया जा रहा है। हालांकि, बीते दिनों बरेली मुरादाबाद और बरेली रोजा पैसेंजर को मेमू में बदले जाने के बाद से इनकी मरम्मत का भार कम हुआ है।
एक ट्रेन के मेंटिनेंस में चाहिए करीब छह घंटे
नियमानुसार एक ट्रेन का मेंटिनेंस करने में करीब छह घंटे का समय निर्धारित है। जंक्शन पर ट्रेनों के मेंटिनेंस के स्लॉट तय किए गए हैं। पुरानी वाशिंग लाइन में 18 और नई वाशिंग लाइन में 24 कोच वाली ट्रेन का मेंटिनेंस करने की क्षमता है। आला हजरत, दादर, महाकाल एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का मेंटिनेंस नई वाशिंग लाइन में ही किया जाता है।
26 कोच की वाशिंग लाइन नहीं बनी
दो साल पहले बरेली जंक्शन पर रेल बजट में 26 कोच की वाशिंग लाइन बनाने का ऐलान किया गया था। इसको लेकर बजट को भी स्वीकृति मिली थी, लेकिन 26 कोच वाली वाशिंग लाइन बनाने का खाका जमीन पर नहीं उतारा जा सका।
इन ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की लंबे समय से मांग
बरेली जंक्शन से चलने वाली साप्ताहिक बरेली महाकाल एक्सप्रेस और बरेली लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस (दादर) को लंबे समय से फेरे बढ़ाने या फिर प्रतिदिन करने की मांग की जा रही है, लेकिन जंक्शन पर संसाधनों के अभाव के कारण ऐसा मुमकिन नहीं हो पा रहा है। दक्षिण भारत के लिए ट्रेन चलाने की मांग भी समय समय पर होती रही है।
प्लेटफार्म बढ़ने तक करना होगा इंतजार
बरेली जंक्शन से ट्रेनों को चलाने के लिए एक बड़ी जरूरत प्लेटफार्म को भी माना जाता है। जंक्शन पर उत्तर रेलवे के चार प्लेटफार्म हैं। जंक्शन का पुनर्विकास करीब 250 से 300 करोड़ की लागत से किया जाना प्रस्तावित है। जिसमें दो प्लेटफार्म भी बढ़ाए जाने हैं। मुरादाबाद रेल मंडल सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में ड्राइंग स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।
जंक्शन से चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें
बरेली वाराणसी, बरेली प्रयागराज, बरेली नई दिल्ली इंटरसिटी, बरेली भुज आलाहजरत, बरेली लोकमान्य तिलक टर्मिनस, बरेली उज्जैन महाकाल एक्सप्रेस।
पैसेंजर ट्रेनें
बरेली दिल्ली, बरेली रोजा, बरेली मुरादाबाद, बरेली अलीगढ़ और बरेली अलीगढ़ पैसेंजर।
बरेली जंक्शन से छह मेल एक्सप्रेस और पांच पैसेंजर ट्रेनें ओरिजनेट होती हैं। यहां से ओरिजनेट होने वाली ट्रेनों का मेंटिनेंस नई और पुरानी वाशिंग लाइन में किया जाता है। सभी ट्रेनों के मेंटिनेंस के लिए स्लॉट निर्धारित हैं। समय से मेंटिनेंस कराने पर पूरा जो रहता है-भानु प्रताप सिंह, स्टेशन अधीक्षक, बरेली जंक्शन।
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