शाहजहांपुर: जिले में 10 लाख 88 हजार 34 मतदाताओं ने नहीं डाला वोट, कम विकास और चुनाव बहिष्कार बना वजह

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Edited By Amrit Vichar
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शाहजहांपुर,अमृत विचार: प्रशासन की महीनों तक की गई मतदान प्रतिशत बढ़ाने की कवायद का असर मतदान प्रतिशत पर नहीं दिखा। बीते चुनाव की अपेक्षा मतदान प्रतिशत बढ़ने की जगह घट गया। जिले में कुल 10 लाख 88 हजार 34 मतदाताओं ने वोट नहीं डाला। सिर्फ 12 लाख 43 हजार 800 मतदाता ही वोट डालने पहुंचे।

ग्रामीण क्षेत्रों में कम विकास कार्य होना और चुनाव बहिष्कार को इसकी वजह माना जा रहा है। भारी संख्या में लोग वोट डालने के लिए घर से नहीं निकले। कुछ लोगों ने मतदान के महापर्व को छुट्टी के दिन की तरह मनाया और आराम करते रहे। शुरुआत में प्रशासन को कम से कम 65 प्रतिशत मतदान की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मतदान बढ़ने की जगह घट गया। 

प्रशासन के अभियान और राजनीतिक दलों की कोशिशें मतदाताओं को घर से निकालने में नाकाम रही। सबसे ज्यादा खराब स्थिति शहर के बूथों की रही। जहां इक्का-दुक्का मतदाता ही लाइन में लगे दिखाई दिए। देहात क्षेत्र में कहीं-कहीं अच्छा मतदान हुआ,

लेकिन कहीं-कहीं मतदान का बहिष्कार कर दिया गया है। जिले में कुल 53.34 प्रतिशत मतदान हुआ। 46.66 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। इस तरह देखें तो कुल 12 लाख 43 हजार 800 मतदाताओं ने ही वोट डाले। जबकि दस लाख 88 हजार 34 मतदाता मतदान से दूर रहे। 

यहां हुआ मतदान बहिष्कार
सोमवार को मतदान के दौरान तमाम स्थानों पर ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार किया। बंडा, पुवायां, खुटार, निगोही, जैतीपुर, जलालाबाद, तिलहर, सेरामऊ दक्षिणी, मिर्जापुर, रोजा और कटरा क्षेत्र में ग्रामीण खुलकर मतदान के विरोध में उतरे।

यहां लोगों ने मतदान करने से मना कर दिया। उन्होंने छुट्टा पशुओं से परेशान होने, सड़कें खराब होने और पुल निर्माण न होने समेत तमाम विकास के मुद्दे उठाए। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें विकास कार्यों के लिए तरसना पड़ रहा है। बार-बार मांग करने के बाद भी विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। 

यह माने जा रहे कारण
मतदान से पहले प्रशासन ने मतदाताओं में जोश भरने के लिए तमाम प्रयास किए थे। बड़े पैमाने पर गांव से लेकर देहात तक जागरूकता अभियान चलाए गए। उम्मीद थी कि साल 2019 की अपेक्षा इस बार मतदान का प्रतिशत बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

मतदाताओं में जोश भरने में प्रशासन नाकाम रहा। मतदाता सूची में तमाम लोगों के नाम नहीं थे, जिस कारण भी लोग मतदान नहीं कर सके। मतदाता पर्ची ठीक से घर-घर नहीं बांटी गई। प्रशासनिक अभियानों का खास असर नहीं दिखा। विकास कार्य न होने से ग्रामीण मतदान के प्रति उदासीन रहे। गर्मी भी मतदान प्रतिशत गिरने का एक कारण रही। 

प्रशासन ने अपनी तरफ से पूरे प्रयास किए थे। भारी संख्या में नए मतदाता बनाए गए। लगातार मतदाता जागरूकता अभियान चलाए गए। कुछ जगह चुनाव बहिष्कार करने का प्रयास हुआ था, लेकिन बाद में सभी बूथों पर मतदान हुआ है। जिले में एक भी मतदान केंद्र ऐसा नहीं है जहां मतदान न हुआ हो- संजय कुमार पांडेय, एडीएम प्रशासन/ उप जिला निर्वाचन अधिकारी।

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