Exclusive: उर्सला अस्पताल में भी होगी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, मरीजों को होंगे ये फायदे...सर्जनों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

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विकास कुमार, अमृत विचार। जिला अस्पताल उर्सला में भी जल्द ही लेप्रोस्कोपिक यानी दूरबीन विधि से ऑपरेशन किए जाएंगे। उर्सला के निदेशक डॉ.एचडी अग्रवाल ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र लिखा है। साथ ही अनुमति भी मांगी है। 

उर्सला अस्पताल में अभी पारंपरिक पद्धति (ओपन सर्जरी ) से ही मरीजों का ऑपरेशन किया जा रहा है, इसमें मरीजों को लंबा चीरा लगाना पड़ता है और अस्पताल में अधिक समय तक रुकना पड़ता है। निदेशक डॉ.एचडी अग्रवाल ने बताया कि लेप्रोस्कोप विधि से ऑपरेशन की अनुमति की मांग महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से की गई है। अनुमति मिलने पर पांच सर्जनों को प्रशिक्षण के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सर्जन मरीजों का लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन करेंगे। 

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के ये होते हैं फायदे 

निदेशक डॉ.एचडी अग्रवाल ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में रक्तस्त्राव बहुत कम होता है। सर्जरी के दौरान बड़ा चीरा लगाने की भी जरूरत नहीं होती है। इसी वजह से मरीज जल्द स्वस्थ होता है। आपरेशन के बाद मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रुकने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। छोटे छेद से की जाने वाली इस सर्जरी से इंफेक्शन का खतरा भी काफी कम रहता है। मरीज 24 घंटे के अंदर चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है। 

इन सर्जरी में मिलेगी लाभ 

लेप्रोस्कोपी सर्जरी से गाल ब्लैडर (पित्त की थैली), अपेंडिक्स, हड्डी, किडनी, लीवर एक्सेस, मोतियाबिंद, नाक, कान,गला, हार्निया के अलावा बड़ी व छोटी आंत का ऑपरेशन आसानी से संभव है। ओपन सर्जरी की तुलना में यह सरल प्रक्रिया है। अस्पताल प्रबंधक डॉ. फैसल नफीस ने बताया कि एक माह में एक हजार मेजर और सात सौ के करीब माइनर सर्जरी की जाती हैं। कभी-कभी यह संख्या बढ़ भी जाती है।

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