बाराबंकी में बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल पर हफ्तेभर में दो मरीजों की जान लेने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग ने किया सील
सूरतगंज/ बाराबंकी, अमृत विचार। इसी सप्ताह बिना रजिस्ट्रेशन संचालित किये गए निजी अस्पातल ने दो मरीजो की जान ले ली। गलत उपचार के आरोप घर वालों ने लगाए। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की। विभाग ने अस्पताल पर नोटिस चस्पा कर अभिलेखों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। वहीं घटना के बाद से संचालक अस्पताल बंद कर फरार है।
रामनगर थाना के मुरारीपुरवा मजरा चैनपुरवा गांव निवासी बसंती देवी ने बुधवार की देर शाम उल्टी-दस्त की बीमारी से जूझ रहे चालीस वर्षीय अपने पति को सूरतगंज बेल चौराहे स्थित अवध हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। बसंती का आरोप है कि गलत इंजेक्शन दिए जाने से उनके पति की मौत हो गई। उसके बाद अस्पताल संचालक खुद को बचाने के लिए उनके पति को ई-रिक्शा से लाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सूरतगंज में छोड़कर फरार हो गया। ऐसा ही कुछ मामला मोहम्मदपुर खाला थाना इलाके के रिछला निवासी 65 वर्षीय उमर के साथ भी किया था। जो गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे। बेटों ने उन्हें बुधवार तीन बजे क्लीनिक में भर्ती कराया। चौबीस घण्टे इलाज करने के बाद उनकी भी हालत बिगड़ने लगी। तो अस्पताल संचालक ने परिजनों को कहीं और ले जाने की सलाह देकर रेफर कर दिया। परिजन उन्हें हिन्द अस्पताल ले जा रहे थे कि फतेहपुर पहुंचते ही बुजुर्ग ने दम तोड दिया। बेटे कल्लू का आरोप है कि हालत में सुधार न होने के बाद भी हॉस्पिटल के डाक्चर ने उनके पिता को जबरदस्ती भर्ती किये रखा। जिससे इनकी मौत हो गई। दो लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। गुरुवार देर रात हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू की। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सूरतगंज के अधीक्षक डा. संजय कुमार पाण्डेय के निर्देश पर टीम के साथ अवध हॉस्पिटल पहुंचे डा. वरुण पाल सिंह ने सीलिंग की कार्रवाई की। वहीं नोटिस चस्पा कर तीन दिन के अंदर अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं घटना के बाद से संचालक अस्पताल बंद कर फरार है।
अवैध अस्पतालों का मकड़जाल
कस्बें में अवैध अस्पताल का मकड़जाल फैला हुआ है। कदम कदम पर प्राइवेट अस्पताल खुले हुए हैं। जिनका विभाग से कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। न ही इनका स्टाफ ही प्रशिक्षित होता है। कहीं न कहीं इनको स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते इनपर कोई कार्रवाई भी नहीं होती। इन अवैध अस्तपालों में अक्सर आशा बहुएं भी मरीजों को लेकर पहुंचती दिखती हैं। मरीज लाने पर आशा बहुओं को कमीशन मिलने की बीत भी कई बार सामने आई है।
वर्जन--
अस्पताल सील करा दिया गया है। समय समय पर इस तरह के प्राइवेट अस्पतालों की जांच कराई जाती है। जिस भी प्राइवेट अस्पताल के खिलाफ आगे भी शिकायत आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आशा बहुओं की अगर किसी भी तरह की मिलीभगत सामने आएगी, तो उनके खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा।
-डा. संजय पांडे, अधीक्षक, सीएचसी सूरतगंज।
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