बाराबंकी: पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा संयुक्त चिकित्सालय

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Edited By Amrit Vichar
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सिरौली गौसपुर/ बाराबंकी, अमृत विचार। सिरौलीगौसपुर में सौ शैय्याओं के जिले के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल में आने वाले मरीजों के बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। 16 चिकित्सकों वाले इस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक न होने की वजह से मरीज को जिला मुख्यालय की ओर रुख करना पड़ता है। मरीजों की भीड़ के हिसाब से इस संयुक्त चिकित्सालय में पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी देखने को मिली। इस सरकारी चिकित्सालय में तीन चिकित्सकों को किसी अन्य अस्पताल में अटैच किया गया है। चिकित्सालय की ओपीडी में आने वाले मरीजों के बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। आने वाले मरीज फर्श पर बैठकर अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं।

पैरामेडिकल स्टाफ की कमी
कहने को तो सौ शैय्याओं वाला यह संयुक्त चिकित्सालय जिले में दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल है। प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या औसत 400 से अधिक होती है। सौ शैय्याओं के संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती मरीजों के सापेक्ष महज पांच स्टाफ नर्स के सहारे भर्ती मरीजों की देखरेख की जा रही है।

गंदगी से संक्रमण का खतरा
संयुक्त चिकित्सालय परिसर में शौचालय टैंक के ओवर फ्लो होने से उससे निकलने वाली गंदगी व बदबू के कारण ओपीडी में दिखाने आने वाले मरीज और उनके परिजन नाक पर रुमाल लगा कर उधर से गुजरते हैं। परिसर में साफ सफाई का उचित प्रबंध न होने की वजह से गंदगी की भरमार है। साफ सफाई न होने की वजह से आने वाले और भर्ती मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा हमेशा बना है।

पंखे के सहारे दिन काट रहे मरीज 
चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। संयुक्त चिकित्सालय में ओपीडी में आ रहे हैं मरीजों व वार्ड में भर्ती मरीजों को कूलर होते हुए पंखे में रहना पड़ रहा है। कूलर शोपीस बनकर रखे हुए हैं।

नाकाफी है वाटर कूलर
भर्ती मरीजों के तीमारदारों को ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए संयुक्त चिकित्सालय में वाटर कूलर की व्यवस्था नाकाफी है। भीषण गर्मी में ओपीडी में आने वाले मरीज के दबाव के हिसाब से यहां ओपीडी में महज एक वाटर कूलर ही लगा हुआ है। इसकी वजह से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

वर्जन--
शौचालय के टैंक की सफाई के लिए नगर पंचायत रामनगर एवं टिकैतनगर नगर को  पहले ही पत्र लिखा जा चुका है। टैंक की सफाई के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है। गर्मी को देखते हुए तीसरे तल पर बने हुए वार्ड में मरीज को भर्ती नहीं किया जाता। जल्दी ही जो भी कमियां है दूर की जाएंगी। --नीलम गुप्ता, सीएमएस।

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