बरेली: बुजुर्गों पर टूटा गर्मी का कहर...श्मशानों पर लगीं कतारें, कोरोना का भयावह दौर आया याद
मई के आखिरी सप्ताह में सामान्य से तीन गुना तक ज्यादा हुईं अंत्येष्टियां, लोगों को कोरोना का भयावह दौर फिर आया याद
शिवांग पांडेय/बरेली, अमृत विचार : गर्मी ने इस बार कई बरसों का रिकॉर्ड तोड़ा तो श्मशान घाटों पर भी शवयात्राओं की इस कदर कतारें लगीं कि लोगों को कोरोना का दौर याद आ गया। मई के आखिरी सप्ताह में जब सूरज का ताप चरम पर था, तब मरने वालों की तादाद सामान्य से लगभग तीन गुना तक जा पहुंची। गर्मी का सबसे ज्यादा कहर बुजुर्गों पर टूटा, लेकिन मेहनत मजदूरी करने वाले लोग भी अच्छी-खासी संख्या में इसके शिकार हुए। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के कागज भले ही साफ हों लेकिन पूरे जिले में गर्मी से सैकड़ों मौतें होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

शहर में सबसे ज्यादा अंत्येष्टि सिटी श्मशान घाट पर होती हैं। यहां का प्रबंधन संभालने वाले पंडित त्रिलोकीनाथ शर्मा के मुताबिक सामान्य स्थिति में रोज यहां 7-8 शव अंत्येष्टि के लिए आते हैं लेकिन मई के आखिरी चार दिनों में कई दिन यह औसत 20 से 28 शवों की अंत्येष्टि तक पहुंच गया। 31 मई को जब तापमान 45 डिग्री पार निकल गया, उस दिन यहां सर्वाधिक 28 शवों का अंतिम संस्कार हुआ। इसी तरह संजयनगर श्मशान भूमि में अंत्येष्टियों का रोज का औसत 3-4 रहता है जो इसी अवधि में 10 से 12 तक पहुंच गया। श्मशान भूमि कर्मचारी नारायण ने बताया कि रविवार दोपहर तीन बजे तक सात शवों की अंत्येष्टि हो चुकी है। शाम 5 बजे तक यह संख्या 10 से 12 तक पहुंच सकती है।

सिटी और संजयनगर श्मशान भूमि के रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों श्मशान घाटों पर मई के आखिरी सप्ताह में 180 से ज्यादा अंत्येष्टि हुईं। इनमें शुक्रवार और शनिवार दोनों दिन 36-36 अंत्येष्टि हुईं। रविवार को भी शाम 4 बजे तक 30 का आंकड़ा पार हो चुका था। चार दिनों का यह आंकड़ा सामान्य की तुलना में तीन से चार गुना है। मई के पूरे महीने में दोनों श्मशान भूमि पर कुल मिलाकर करीब पांच सौ लोगों की अंत्येष्टि हुई है। अगर मुस्लिम और ईसाइयों के कब्रिस्तान के भी आंकड़े जोड़ लिए जाएं तो मई की गर्मी में मरने वालों का आंकड़ा भयावह हो सकता है। इन दिनों में शव ढोने वाले वाहन भी काफी व्यस्त रहे। पंजाबी महासभा के अध्यक्ष संजय आनंद ने बताया कि संस्था के शव वाहन लगातार मृतकों के परिवारों का सहयोग कर रहे है। मई में 114 शवों को श्मशान भूमि पहुंचाया गया है। चार दिनों में 25 शव पहुंचाए हैं।

70 पार के ज्यादातर लोग, परिजनों ने बताए मृत्यु के हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और गर्मी से चक्कर आने जैसे कारण
सिटी श्मशान भूमि के पंडित त्रिलोकी नाथ शर्मा ने बताया कि 31 मई को यहां जब सर्वाधिक 28 अंत्येष्टि हुई तो सुबह से शाम तक शव लेकर आने वालों की ऐसी लाइन लगी कि कोरोना की दूसरी लहर का खौफनाक मंजर याद आने लगा। उन्होंने बताया कि मई के महीने में 297 शवों की अंत्येष्टि हुई है जबकि आमतौर पर यह औसत 180 के पार नहीं जाता। गर्मियों में शवों की संख्या बढ़ती जरूर है लेकिन पहली बार तीन गुना तक पहुंच गई। पिछले एक सप्ताह में ही यहां 131 शवों की अंत्येष्टि की गई है। संजयनगर श्मशान भूमि के कर्मचारी नारायण पटेल ने बताया कि मृतकों में अधिकांश 70 साल से ज्यादा लोग हैं। इनकी संख्या 60 से 70 प्रतिशत हो सकती है। परिजनों ने उनकी मौत की वजह हार्टअटैक, गर्मी से चक्कर आना, हाई ब्लड प्रेशर से ब्रेन स्ट्रोक को बताया है। बाकी मृतकों में 30 से 50 साल की उम्र के लोग थे।
अंत्येष्टि करने के लिए करना पड़ रहा है घंटों इंतजार
सिटी श्मशान भूमि पर लगातार ज्यादा संख्या में शव आने के कारण लोगों को अंत्येष्टि के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। रविवार शाम 4 बजे अमृत विचार की टीम यहां पहुंची तो कुछ ही देर में एक-एक कर पांच शव यहां अंत्येष्टि के लिए लाए गए। दो शव यात्राएं सिटी श्मशान भूमि रेलवे क्रॉसिंग बंद होने की वजह से रुकी हुई थीं। शव वाहन को धूप में खड़ा कर यात्रा में शामिल लोग क्रॉसिंग खुलने का इंतजार कर रहे थे।

गर्मी की वजह से उम्रदराज लोगों में उखड़ने लगते हैं पुराने रोग
मई के आखिरी चार दिनों में जिले का अधिकतम मान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। फिजिशियन डॉ. राहुल वाजपेयी के अनुसार ज्यादा गर्मी में उम्रदराज लोगों के पुराने रोग जानलेवा हो जाते है। लू चलने से सर्वाधिक लोग बेहोशी, चक्कर, घबराहट, हाई ब्लडप्रेशर, उल्टी, दस्त, कमजोरी जैसे लक्षणों के शिकार होने लगते हैं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, कैंसर लिवर के पुराने रोग उखड़ जाते है। गर्मी के इसी दुष्प्रभाव से लोगो की जान चली जाती है।
30 मई से 1 जून तक सबसे ज्यादा मारामारी, चबूतरे खाली न मिले तो जमीन पर अंत्येष्टि
सिटी और संजयनगर दोनों श्मशान भूमि पर सामान्य से तीन गुना शव पहुंचने की वजह से जगह कम पड़ गई। सिटी श्मशान भूमि पर चिताएं जलाने के लिए कुल 35 चबूतरे हैं। प्रबंधन के अनुसार एक चबूतरे पर अंत्येष्टि के बाद चिता को शांत होने के 24 घंटे या उससे भी ज्यादा समय लगता है। 30 मई से 1 जून तक भयावह स्थिति रही। इन तीन दिनों में 46 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। सभी 35 चबूतरों शवों के दहन के कारण जगह न मिली तो कई लोगों को जमीन पर ही चिता सजाकर मृतकों का अंतिम संंस्कार करना पड़ा।
एक सप्ताह में हुए अंतिम संस्कार
तिथि सिटी संजयनगर
26 मई 07 03
27 मई 20 06
28 मई 15 08
29 मई 10 10
30 मई 20 09
31 मई 28 08
01 जून 24 12
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