Kanpur News: ट्रेन का सफर नहीं आसान, जोखिम में जान... ठसाठस कोचों में खड़े-खड़े यात्रा, बैठने के लिए नहीं मिल रही सीट

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में ट्रेन का सफर नहीं आसान, जोखिम में जान

कानपुर, अमृत विचार। दिल्ली, हावड़ा व झांसी रूटों पर दौड़ रहीं ट्रेनों में यात्री जबरदस्त दुश्वारियां झेल रहे हैं। जनरल कोच ही नहीं स्लीपर व एसी कोचों का भी यही हाल है। यात्रियों से ठसाठस भरे जनरल कोचों में बैठना तो दूर खड़े होने की जगह मिलना संभव नहीं है। इस भीषण गर्मी में पंखे और एसी भी धड़ाम हैं। ऐसे में यात्री जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। रविवार को पनवेल एक्सप्रेस में एक मां बुखार से तप रहे अपने मासूम बेटे को गोद में लेकर सफर करते दिखी।  

समर स्पेशल और रूटीन ट्रेनों में व्यवस्था और शेड्यूल करीब एक माह से बेपटरी है। लंबे रूट की ट्रेनें दम घुटाने वाली भीड़ साथ लेकर चल रहीं हैं। आलम यह है कि यात्रियों से ट्रेनों के शौचालय तक भरे होते हैं। ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों को टॉयलेट की भी सुविधा नहीं मिल पा रही है।

रविवार को सेंट्रल स्टेशन से गुजरी कई ट्रेनों में यात्रियों की हालत बिगड़ रही। सीमांचल एक्सप्रेस के जनरल कोच में खड़े होने की भी जगह नहीं थी। यात्री कपड़े का झूला बनाकर उसमें बैठकर सफर करते दिखे। बेहाल कर देने वाली इस गर्मी में जनरल कोच के पंखे भी बंद मिले। 

वहीं पनवेल एक्सप्रेस का नजारा परेशान करने वाला था। बुखार से तप रहे मासूम बेटे को गोट में लिए मां कोच के दरवाजे के पास बैठी थी। पूछने पर महिला ने बताया कि बेटे को बहुत तेज बुखार है। गर्मी के कारण बुखार बढ़ता ही जा रहा है। कोच के अंदर बैठने की जगह नहीं है और पंखा भी नहीं चल रहा है। मजबूरी में गेट पर बैठ गए है, जिससे बेटे को कुछ हवा मिलती रहे।

वहीं मां की गोद में बच्चा बेसुध पड़ा था। इन दोनों ट्रेनों में उमस व गर्मी से बच्चे और बुजुर्ग बेहाल दिखे। ट्रेन के गेट पर यात्री लटकने ऐसी हालत में सफर करते दिखे। नाक पर रुमाल लगाकर यात्री शौचालय के बाहर खड़े होकर यात्रा करते दिखे। यात्रियों ने कहा कि स्पेशल ट्रेन 25-30 घंटे तक लेट चल रही हैं। इस कारण उसमें सफर करने से लोग कतरा रहे है। वहीं रूटीन ट्रेनों में जान जोखिम में डालकर यात्रा की जा रही है।  

स्लीपर में जनरल कोच के यात्री 

इस समय ट्रेनों में खड़े होने तक की जगह नहीं है। ट्रेनों में जनरल कोच की कमी के कारण यात्री परेशान हो रहे हैं। स्थिति यह है कि लोग बिहार से दिल्ली तक का सफर खड़े होकर और बाथरूम के बाहर बैठकर पूरा कर रहे हैं। स्लीपर कोचों में जनरल टिकट वाले यात्रियों की भीड़ रहती है। ऐसे में यात्री न तो आरक्षित सीट पर लेट पा रहे हैं और न ही ठीक से बैठकर यात्रा कर पा रहे हैं। 

छह घंटे बगैर एसी के सफर 

सियालदह अजमेर एक्सप्रेस में रविवार को छह घंटे तक एसी धड़ाम रहने से यात्री बेहाल रहे। ट्रेन नंबर 12987 सियालदह अजमेर एक्सप्रेस, कोलकाता सियालदह रेलवे स्टेशन से चलकर अजमेर जा रही थी। इस ट्रेन में सफर करने वाले अश्वनी वैश्नव ने बताया एसी कोच में हर यात्री पसीना से भीगा है। ट्वीट समेत अन्य प्रकार से बार-बार शिकायत के बाद सुनवाई नहीं है। टेक्निकल फाल्ट बताया जा रहा है। तकनीकी स्टाफ फाल्ट नहीं तलाश पा रहा है। सेंट्रल स्टेशन पर काफी मशक्कत के बाद एसी ठीक करके ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया।

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