Farrukhabad: गठबंधन के सहारे रफ्तार पकड़ी साइकिल किनारे जाकर हुई पंचर...पिछले चुनाव की तरह जनता ने इस बार भी नकारा

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फर्रुखाबाद में पिछले चुनाव में भी सपा-बसपा गठबंधन को फर्रुखाबाद की जनता था नकारा

फर्रुखाबाद, (चन्द्रपाल सिंह सेंगर)। दो लोकसभा चुनाव में फर्रुखाबाद की जनता ने गठबंधन के प्रत्याशी को नकार दिया। इस बार भी गठबंधन के सहारे साइकिल ने रफ्तार तो तेजी से पकड़ी, लेकिन किनारे पर जाकर पंक्चर हो गई। इससे एक बार फिर साबित हो गया कि जनपद के मतदाता गठबंधन को पसंद नहीं करते।

वर्ष 2012 में सपा ने प्रदेश में पूर्ण बहुमत से प्रदेश में सरकार बनाई थी। इसी के सहारे वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन मोदी लहर ऐसी चली कि प्रचंड बहुमत से देश में भाजपा की सरकार बनी थी। भाजपा के बढ़ते कद को देख 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नया दांव खेलते हुए कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। 

दांव उल्टा पड़ गया और सपा चारों खाने चित हो गई। 2012 में सपा ने लोकसभा फर्रुखाबाद की विधानसभा अमृतपुर, भोजपुर, कायमगंज और अलीगंज में जीत का परचम फहराया था। सदर सीट से विजय सिंह ने निर्दलीय उम्मीदार के रूप में जीत दर्ज की। 

हालांकि वह सपा के बेहद करीबी थी। सपा फर्रुखाबाद की सीट को अपनी मजबूत सीट मानने लगी। 2014 के चुनाव में सपा ने पहले अपनी ही पार्टी के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के पुत्र सचिन यादव को टिकट दिया और बाद में ​उनका टिकट काटकर एटा के रामेश्वर सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया। टिकट कटने से नाराज पूर्व मंत्री के पुत्र ने बगावत करते हुए निर्दल चुनाव लड़ा। 

इसका नतीजा यह हुआ कि रामेश्वर सिंह 255693 वोट लाए और भाजपा प्रत्याशी मुकेश राजपूत 406195 वो लाकर करीब एक लाख से जीते थे। वर्ष 2019 में सपा ने बसपा से गठबंधन किया। सपा के कई दिग्गज नेता फर्रुखाबाद से चुनाव लड़ने के लिए चुनावी चौंसर बिछाए बैठे थे, लेकिन बसपा मुखिया ने अपने खाते में फर्रुखाबाद की सीट रखते हुए सपा-बसपा गठबंधन से मनोज अग्रवाल को प्रत्याशी बना दिया। 

इस चुनाव में भी गठबंधन प्रत्याशी को दो लाख से ज्यादा वोटों से करारी हार का सामना करना पड़ा था। सपा ने एक बार फिर 2024 में कांग्रेस से गठबंधन तो किया, लेकिन सीटों के बंटवारे में कांग्रेस की एक न चलने दी। 

नतीजा यह रहा कि कांग्रेस ने पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को टिकट नहीं दी। सपा ने डॉ. नवल किशोर शाक्य को इंडिया गठबंधन का प्रत्याशी बनाया। इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी ने भाजपा को कड़ी टक्कर भी दी, लेकिन जीत तक दहलीज पर जाने से चूक गई।

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