बरेली: रोडवेज को रोजाना सात लाख की चपत लगा रहे डग्गामार वाहन

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बरेली, अमृत विचार। जिले में चलने वाले डग्गामार वाहन रोडवेज को रोजाना करीब सात लाख रुपये की चपत लगा रहे हैं। इसके बावजूद इनके संचालन पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संभागीय परिवहन विभाग द्वारा कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। डग्गामार वाहनों से सिर्फ …

बरेली, अमृत विचार। जिले में चलने वाले डग्गामार वाहन रोडवेज को रोजाना करीब सात लाख रुपये की चपत लगा रहे हैं। इसके बावजूद इनके संचालन पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संभागीय परिवहन विभाग द्वारा कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।

डग्गामार वाहनों से सिर्फ लोगों की जान को ही खतरा नहीं है बल्कि रोडवेज को भी राजस्व की चपत लग रही है। इन डग्गामार वाहनों की वजह से रोडवेज को हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। आरएम एसके बनर्जी ने बताया कि यदि डग्गामार वाहन पूरी तरह से बंद हो जाएं तो रोडवेज की आय में रोजाना कम से कम छह से सात लाख रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।

बताया जा रहा है कि डग्गामार बसें सिर्फ छोटे रूटों पर ही नहीं बल्कि लंबे रूटों पर भी दौड़ती है। परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो बरेली जिले से डग्गामार बसों का संचालन सूरत, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र समेत अन्य प्रदेशों में होता है।

दलालों की मदद से हो रहा संचालन
जिले में चलने वाले डग्गामार वाहनों के संचालन में दलालों की अहम भूमिका है। परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो ये दलाल हर प्रदेश में मौजूद रहते हैं। वहां से आने-जाने वाले श्रमिकों या अन्य यात्रियों की बुकिंग कर लेते हैं। जब इनके पास करीब 50 सवारियां हो जाती हैं तो ये बस मालिक को सूचित कर देते हैं। इसके बाद स्थानीय दलालों से संपर्क कर सवारियों को भेज दिया जाता है और वहां से भी सवारियों को बुला लिया जाता है।

देहात क्षेत्र से मिलती हैं ज्यादा सवारियां
दलालों की नजर देहात क्षेत्र के यात्रियों पर ज्यादा रहती है। जिले के नवाबगंज, बहेड़ी, शीशगढ़, मीरगंज, फरीदपुर आदि इलाकों से तेजी से बुकिंग होती है। त्योहारों के समय इन डग्गामार वाहनों का पीक समय होता है। दीपावली के करीब आते-आते ये लोग करोड़ों का व्यापार कर लेते हैं।

“डग्गामार वाहनों पर रोक लगाने के लिए हर दिन अभियान चलाया जा रहा है। इसमें दलालों को सबसे बढ़ा हाथ रहता है। सभी जिलों से सीज किए गए वाहनों की रिपोर्ट मांगी है। जल्द ही रिपोर्ट उपलब्ध हो जाएगी। हमारी कोशिश रहती है कि इन वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगे।” –डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, आरटीओ

“डग्गामार वाहन ज्यादा सवारियां देहात क्षेत्रों से बिठाते हैं। त्योहारों का सीजन आते ही इनका पीक टाइम शुरू हो जाता है। यही समय रोडवेज की भी आमदनी बढ़ाने का होता है। इनकी वजह से रोडवेज को काफी घाटा हो जाता है। ये लोग एक दिन में 5 से 7 लाख रुपये तक का व्यापार कर लेते हैं।”—एसके बनर्जी, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज

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