आपसी खींचातानी और अंदरुनी कलह से बाराबंकी में डूबी भाजपा की नैया

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दूसरे दलाें से आए धूमिल कार्यकर्ताओं को महत्व, तो पुरानों को किनारा करना पड़ा भारी

विवेक शुक्ला/रामनगर/ बाराबंकी, अमृत विचार। लोकसभा चुनाव में भाजपा के जिम्मेदार लोगों की आपसी खींचातानी व अंदरूनी कलह तथा समर्पित निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करना भाजपा को भारी पड़ गया। यदि समय रहते पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा शिकंजा कसा गया होता तो शायद भाजपा को हार का सामना न करना पड़ता। सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी तनुज पुनिया भाजपा प्रत्याशी राजरानी रावत को 2 लाख से अधिक मतों से हराकर कई चुनाव का रिकॉर्ड तोड़ा है। इससे क्षेत्र में भाजपा की बड़ी किरकिरी हो रही है। 

गौरतलब बात यह है कि इस चुनाव में भाजपा के निष्ठावान समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा व दूसरे दलों से आए हुए धूमिल छवि के कार्यकर्ताओं को बड़ा महत्व दिया गया। जिसके चलते समर्पित कार्यकर्ताओं ने भी पूरी ताकत के साथ पार्टी प्रत्याशी को जिताने में रुचि नहीं दिखाई। और जो दूसरे दलों से आए हुए कार्यकर्ता थे वह चुनाव को मौज मस्ती समझ करके अपना उल्लू सीधा करते रहे। यहां तक की विधानसभा के चुनाव में विधायिकी के टिकट के लिए प्रबल दावेदारी करने वाले दिग्गज नेता पूर्व विधायक अमरेश शुक्ला, रामबाबू द्विवेदी, प्रमोद तिवारी, राधा कृष्ण मिश्रा, रामकिशोर शुक्ला भाजपा के बड़े चुनावी मंचों पर अपना चेहरा भले ही दिखाने में आगे रहे हो ,लेकिन जनता के बीच में जाकर डोर टू डोर वोट मांगना मुनासिब नहीं समझा। पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत ने भी कोई रुचि नहीं दिखाई। निवर्तमान सांसद उपेंद्र सिंह रावत भी कहने भर के लिए पार्टी के प्रति निष्ठावन बने रहे, लेकिन टिकट कटने के चलते चुनाव में पार्टी प्रत्याशी को जिताने में कोई रुचि नहीं दिखाई। यहां तक की उनके पैतृक गांव तथा आसपास की कई पोलिंगों पर भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। 

पूर्व विधायक शरद अवस्थी के बहुत ही करीबी जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि ललित वर्मा पप्पू भी अपने आसपास की सजातीय बाहुल्य पोलिग को जिता पाना तो दूर की बात रही करारी हार हुई। इन्ही के खासम खास भाजपा के जिला उपाध्यक्ष प्रमुख प्रतिनिधि सूरतगंज शेखर हयारण भी अपने बूथों पर बीजेपी को नहीं जिता सके। हालांकि लोगों का कहना है कि मतदान के कुछ दिन पहले भाजपा मंडल अध्यक्ष कमलेश शुक्ला के अभद्र व अपमानजनक व्यवहार करने से नाराज शेखर हायरण के समर्थकों व खासकर पिछड़ा वर्ग के लोगों ने भाजपा को वोट न देकर गठबंधन प्रत्याशी को देकर दोहरा लाभ पहुंचाया। कस्बा रामनगर में भाजपा नेताओं की आपसी खींचातानी के बीच भाजपा यहाँ के बूथों पर मामूली मतों से चुनाव तो जीत गई, लेकिन हर बार की तरह इस बार भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। 

भाजपा में जबरदस्त गुट बाजी के चलते चुनावी सभा में तमाम नेताओं ने पूरी तरह से सहभागिता करना मुनासिब नहीं समझा। जिसका जनमानस में बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। सूत्र बताते हैं कि भाजपा पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करारी हार पर मंथन करके चुनाव में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले जिम्मेदार लोगों पर अपना हंटर चलाने जा रही है। शीघ्र ही पार्टी में भारी उलट फेर देखने को मिल सकता है।

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