भाजपा की हार का खुलने लगा राज, कैबिनेट मंत्री नंदी के बूथ पर फेल हो गयी भाजपा की टीम
मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में कांग्रेस और सपा ने मारी बाजी, अर्श से फर्श तक की लड़ाई में धडाम हो गयी बसपा
इलाहाबाद सहित 4 सीटों दी बीएसपी की जमानत जब्त
प्रयागराज, अमृत विचार : लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद की सीट पर भाजपा के प्रत्याशी नीरज त्रिपाठी अपने अथक प्रयासों के बाद भी कमल नही खिला सके। कमल न खिलने का सबसे बड़ा कारण यह भी सामने आया है कि नीरज त्रिपाठी इस राजनिति के युद्ध में नए योद्धा थे। इसके अलावा उनके साथ चलने वाले भाजपा नेताओ ने भी उनके साथ भितर घात किया है। जिसकी वह से इस अखाड़े में उन्हें हार देखने पड़ी।
जिसका लाभ सपा से कांग्रेस में आये दिग्गज नेता उज्ज्वल रमण सिंह को 40 साल बाद इलाहाबाद की सीट पर जीत मिल सकी। लोकसभा चुनाव के बाद अब सीएम योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रियों के साथ बैठक कर समीक्षा कर रहे है। जिसमें सबसे बड़ी कमी कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी की सामने आये है। नीरज त्रिपाठी के चुनाव में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी व उनकी पत्नी पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता के बूथ पर आखिर भाजपा अपना कमल क्यों नही खिला सकी। आंकड़ों और समीक्षा की बात करे तो नंदी का बूथ बहादुरगंज स्थित ठाकुरदीन का हाता बूथ संख्या 210 है। जहां पर कांग्रेस को कुल 362 वोट मिले जबकि भाजपा को मंत्री के बूथ पर सिर्फ 105 वोट ही नसीब हुआ।
नंदी के विधान सभा क्षेत्र में सिमट गयी भाजपा
मंत्री नंदी की बात करें तो उनके विधानसभा क्षेत्र में कई बूथों पर भाजपा सिमट कर रह गयी। वहीं कांग्रेस को 300 ने 400 हंसिल किया। शहर दक्षिणी की बात करें तो मंत्री का करेली बूथ मुस्लिम बाहुल्य रहा है। जहां कांग्रेस हावी रही। कांग्रेस को 1521 वोट मिले, जबकि भाजपा को सिर्फ 69 वोट मिल सके। वही दरियाबाद में कांग्रेस को 2332 और भाजपा के खाते में 653 वोट आया। इसी तरह से नखास कोहना में कांग्रेस को 2491 और भाजपा को महज 1074 वोट, तुलसीपुर में कांग्रेस को 1289 व भाजपा को 685 वोट, मीरापुर में कांग्रेस को 3330 व भाजपा को 445 वोट, 685 वोट, मीरापुर में कांग्रेस को 3330 व भाजपा को 445 वोट, मीरापुर-2 में कांग्रेस को 1049 व भाजपा को 5701 वोट मिले। नखास कोहना के बूथ संख्या 9 पर कांग्रेस को 476 तो भाजपा को 20 वोट ही मिल सके। इसी तरह तमाम बूथ हैं। जहां पर भाजपा कम वोट से हार गयी।
प्रवीण पटेल को अपनी विधानसभा में नही मिला वोट
फूलपुर सीट इस बीजेपी प्रत्याशी प्रवीण पटेल भाजपा से सांसद तो बन गये, लेकिन अगर विधानसभा की बात करें तो वह अपनी ही विधानसभा में वोट नही निकाल सके। प्रवीण पटेल 2022 के विधानसभा चुनाव में जीते थे और विधायक चुने गए । लेकिन इस बार सपा से बहुत ही कम अंतर पर वोट पाकर जीत हांसिल कर सके।
शहर पश्चिमी व उत्तरी से मिला बंपर वोट
फूलपुर संसदीय क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा हैं। जिसमें तीन विधानसभा सीट पर प्रवीण पटेल अमरनाथ मौर्य से कम वोट पाकर हार गये। वहीं शहर उत्तरी और पश्चिमी से उन्हें बंपर वोट मिला। जिसकी वजह से प्रवीण पटेल जीतकर सांसद बन गये। उन्हें शहरी उत्तरी में 91440 और अमरनाथ को 61735 वोट मिला। जबकि पश्चिमी से प्रवीण को 106414 और अमरनाथ को 91629 वोट मिला। दोनों विधानसभाओं में सपा साफ हो गई। गौर करने की बात है कि शहर उत्तरी से भाजपा के हर्षवर्धन वाजपेयी विधायक है और शहर पश्चिमी से सिद्धार्थनाथ सिंह बीजेपी के विधायक हैं।
इलाहाबाद सहित 4 सीटों दी बीएसपी की जमानत जब्त
फॉर्मूला लेकर यूपी की सत्ता प्रयागराज में ब्राम्हणों के वजूद को लेकर बसपा का परचम लहराया था। चुनाव कोई भी रहा हो।यहां बहुजन समाज पार्टी हमेशा सुस्त रही है। जिसका समीकरण साफ दिखाई दिया और नतीजा यह रहा कि बसपा पूरी तरह से साफ हो गयी। बसपा के प्रत्याशी अपनी जमानत तक नही बचा सके। एक बात यही भी है कि कभी बहुजन समाज पार्टी का प्रयागराज मंडल में रसूख रहा है।
2007 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मंडल के इलाहाबाद, फूलपुर, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर 2024 में जमानत भी नहीं सके पाई। हलांकि यह कोई पहली बार नही हुआ है। इससे पहले भी बसपा का प्रयास असफल रहा है। जिले के चारों सीटों की बात करें तो फूलपुर में बसपा प्रत्याशी जगन्नाथ पाल ही 82586 वोट पा सके है। जबकि प्रतापगढ़ में प्रथमेश मिश्र 80144, कौशाम्बी में शुभनारायण 55858 और इलाहाबाद में रमेश कुमार पटेल ने 49144 वोट हांसिल किये है। जबकि इतना वोट मायने नही रखता है। इतने वोट में भी यह यह जमानत नहीं बचा पाये।
