NHM: संविदा कर्मचारियों से हो सकती है धन उगाही, शोषण का भी खतरा, बचने के लिए संघ ने भेजा सुझाव

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। नेशनल हेल्थ मिशन में कार्यरत कर्मचारियों से धन उगाही हो सकती है। उनका शोषण भी किया जा सकता है। मौजूदा समय में कार्मिकों के अप्रेजल और वार्षिक अनुबंध प्रक्रिया में कई समस्याएं उत्पन्न भी हो रही हैं। इन सारी समस्याओं के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने एनएचएम के मिशन निदेशक को एक पत्र लिखा है। जिसमें कर्मचारियों की समस्याओं के निदान के लिए कई सुझाव दिये गये हैं।

खास बात यह है कि जो सुझाव कर्मचारी संघ की तरफ से दिये गये हैं, उनमें से कुछ नियम बिहार राज्य में लागू भी हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ की तरफ से कहा गया है कि यदि उनके सुझावों को माना गया तो संविदा कर्मियों की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री योगेश उपाध्याय ने बताया है कि 7 जुलाई 2024 को मानव संसाधन अनुभाग की तरफ से जनपद और ब्लॉक स्तर पर कार्यरत मानव संसाधन का वार्षिक अप्रेजल, नवीनीकरण और वार्षिक वेतन वृद्धि किए जाने के संबंध में निर्देश निर्गत किए गए थे। जिसमें वर्तमान अप्रेजल और वार्षिक अनुबंध प्रक्रिया में कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसी को लेकर मिशन निदेशक को संघ की तरफ से सुझाव भेजा गया है। जिससे समस्या का समाधान हो सके।

कार्मिकों का शोषण और धन उगाही

उन्होंने बताया कि अप्रेजल और वार्षिक अनुबंध के नाम पर हर स्तर पर कार्मिकों का शोषण और धन उगाही की संभावना होती है। इस प्रक्रिया में सुधार कर एक नई नीति बनाई जानी चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कार्मिकों का शोषण न हो।

ऑनलाइन रिपोर्टिंग और समीक्षा

योगेश उपाध्याय ने बताया कि वर्तमान स्थिति में सभी कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग ऑनलाइन होती है और प्रत्येक माह समीक्षा भी होती है। ऐसे में उसी समीक्षा को वर्ष में एक से अधिक बार करना विभाग के समय और संसाधनों की बर्बादी है। मासिक समीक्षा को ही वार्षिक अप्रेजल के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।

प्रारंभिक सेवा अनुबंध

योगेश उपाध्याय ने बताया कि एनएचएम कार्मिकों का अनुबंध प्रारंभिक सेवा के समय लिया जाना चाहिए, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण बिंदु जोड़े जाने चाहिए ताकि अनुबंध का दुरुपयोग न हो सके। जिन बिन्दुओं को शामिल करना चाहिए, उनमें से सेवा काल की स्पष्टता, कार्यकुशलता और सत्यनिष्ठा की शर्तें,अनुशासनहीनता और लापरवाही पर कार्रवाई के प्रावधान,सेवा काल और नौकरी की सुरक्षा आदि शामिल हैं।

एनएचएम कार्मिकों पर लागू मानव संसाधन नीति के अनुसार उनका सेवा काल 65 वर्ष का होगा, जो कि भारत सरकार की तरफ से कार्यक्रम के संचालन के लिए प्राप्त स्वीकृति तक मान्य होगा।

उन्होंने बताया कि इन सुझावों के आधार पर, एक पारदर्शी और न्यायसंगत नीति बनाई जानी चाहिए जिससे कार्मिकों का शोषण रोका जा सके और उनके कार्य का उचित मूल्यांकन हो सके।

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