Bareilly News: क्योंकि बेरोजगार वोट भी डालते हैं...रोजगार मेलों का लक्ष्य तीन गुना
अनुपम सिंह, बरेली, अमृत विचार। लोकसभा चुनाव से पहले ही बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बनकर उभरने का नतीजा यह है कि पिछली बार से करीब तीन गुना रोजगार मेले आयोजित करने का लक्ष्य बरेली को दिया गया है। यह लक्ष्य पिछले नौ वर्षों में सर्वाधिक है। इन मेलों में जिले भर के 83 हजार से ज्यादा बेरोजगार युवाओं में से सात हजार को नौकरियां दिया जाना तय किया गया है।
हालांकि प्राइवेट और सरकारी नौकरियों का पेच इस लक्ष्य में भी फंसा दिखाई दे रहा है। इन रोजगार मेलों के जरिए युवाओं को प्राइवेट नौकरियां ही मिल पाएंगी और पिछले बरसों का इतिहास यह है कि ज्यादा काम और कम वेतन की वजह से युवाओं का प्राइवेट नौकरियों से मोह भंग होता रहा है।
सेवायोजन विभाग को रोजगार मेलों का नया लक्ष्य लोकसभा चुनाव से पहले ही दे दिया गया था लेकिन इनका आयोजन चुनाव बाद अब शुरू होगा, जब बेरोजगारी का असर चुनावी नतीजों पर साफ दिखाई दे चुका है। बेरोजगारी का मुद्दा चुनाव से काफी पहले ही देश में गूंजने लगा था, माना जा रहा है कि इसी को देखते हुए सरकार ने रिकॉर्डतोड़ रोजगार मेलों का लक्ष्य दिया है।
अफसरों के मुताबिक प्रदेश के बाकी सभी जिलों में भी इसी तरह लक्ष्य बढ़ाया गया है। हालांकि बरेली में बेरोजगार युवाओं की संख्या की तुलना में इसे भी काफी कम बताया जा रहा है। युवा इससे कितना संतुष्ट होंगे, यह तो आने वाले समय में ही तय होगा लेकिन इतना संकेत जरूर मिल रहा है कि सरकार बेरोजगारी के मुद्दे पर गंभीर हो गई है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2023-24 में सिर्फ 15 रोजगार मेले आयोजित कर 2560 युवाओं को नौकरी दिलाने का लक्ष्य बरेली को दिया गया था। 2022-23 में 14, 2021-22 में 19, 2020-21 में 18, 2019-20 में 16, । 2018-19 में 15, 2017-18 में 15, 2016-17 और 2015-16 में 12-12 रोजगार मेले का लक्ष्य बरेली को दिया गया था। इस बार इन सारे बरसों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 42 रोजगार मेलों के आयोजन का लक्ष्य दिया गया है।
सरकारी सिस्टम 2019 से पहले गंभीर ही नहीं था, चुनावी साल में बनाया रिकॉर्ड
रोजगार के मुद्दे पर सरकारी सिस्टम गंभीर ही नहीं था। इसका उदाहरण यह है कि 2019-19 में बरेली को 15 रोजगार मेलों का लक्ष्य दिया गया लेकिन आयोजित हुए 12 ही। इससे पहले भी लक्ष्य बस किसी तरह पूरे किए जाते रहे। 2017-18 में 15 मेलों के लक्ष्य के सापेक्ष 16 मेले लगे। 2016-17 और 2015-16 में 12-12 मेले का लक्ष्य मिला, लगे भी इतने ही। दोनों वर्षों में गिनती के युवाओं को नौकरी दी गई। लेकिन इसके बाद सेवायोजन विभाग ने सक्रियता दिखानी शुरू की।
2020-21 में 18 के लक्ष्य के सापेक्ष 33 मेले लगाकर 8041 युवाओं को नौकरी दिलाई गई। 2021-22 में 19 के सापेक्ष 23 मेले लगाए और 5387 को रोजगार दिलाया। 2022-23 में 14 की जगह 28 मेल लगाकर 6801 को रोजगार दिया गया। चुनावी साल 2023-2024 में और भी बड़ा रिकॉर्ड बना। विभाग ने 15 मेलों के लक्ष्य के सापेक्ष 52 रोजगार मेले लगाकर 8460 लोगों को नौकरियां दिलाईं।
बरेली मंडल में दो लाख से ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार
वित्तीय वर्ष 2023-24 में सेवायोजन विभाग के पोर्टल पर बरेली में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 83 हजार 229 थी। इसके अलावा पीलीभीत में 43 हजार 228, बदायूं में 42 हजार 540 और शाहजहांपुर 40 हजार 310 पंजीकृत बेरोजगार थी। हालांकि अनाधिकारिक तौर पर बेरोजगारों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा बताई जाती है।
आठ साल का इतिहास, एक-तिहाई को तो नौकरी नहीं मिली, 25 फीसदी ने छोड़ दीं
वर्ष 2015-16 से 2022-23 तक आठ साल में शासन से 121 रोजगार मेलों का लक्ष्य मिला था जिसके सापेक्ष विभाग ने 157 रोजगार मेले लगाए। इनमें करीब 10870 युवाओं ने प्रतिभाग किया लेकिन एक-तिहाई को नौकरी नहीं मिल सकी।
सिर्फ 31,570 बेरोजगारों को ही नौकरियां मिल पाईं लेकिन करीब 25 फीसदी युवाओं ने कुछ ही समय बाद कम वेतन और ज्यादा काम की वजह से उन्हें छोड़ दिया। नौकरी छोड़ने के कारणों की सरकार कुछ साल से रैंडम जांच कराने लगी है। इस जांच में भी सबसे प्रमुख वजह कंपनियों की ओर से कम पैसे देकर काम का बेतहाशा दबाव बनाने और घर से कार्यस्थल की लंबी दूरी बताई जा चुकी है।
रोजगार मेले लगाने का इस बार लक्ष्य बढ़ाया गया है। बेरोजगार घूम रहे युवाओं के लिए यह अच्छी बात है। लक्ष्य पूरा करने के लिए स्कूल-कॉलेजाें से संपर्क शुरू कर दिया है। कोशिश करेंगे कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार दिलाया जाए। - त्रिभुवन सिंह, सहायक निदेशक सेवायोजन
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