लखनऊ: करोड़पति कब्जेदारों की सूची देख कोर्ट ने दिया अकबरनगर में ध्वस्तीकरण का आदेश

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Edited By Amrit Vichar
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सपा सरकार में कुकरैल नदी पर पर्यावरण संरक्षण के मानकों को किया था दरकिनार, पुनर्जीवन के लिए योगी सरकार ने लड़ी निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई

लखनऊ, अमृत विचार। अकबरनगर की अवैध बस्ती के ध्वस्तीकरण के लिए एलडीए ने लंबी लड़ाई लड़ी। ध्वस्तीकरण के विरोध में कब्जेदारों ने बड़े-बड़े वकीलों को खड़ा किया। निचली अदालत से हाईकोर्ट तक तमाम दलीलें दी। न्यायालय ने भी एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बेघर होने से बचाने के लिए शुरूआत में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई।

लेकिन विकास प्राधिकरण ने कब्जेदारों को सपा सरकार द्वारा पोषित बताकर 73 ऐसे कब्जेदारों का ब्योरा पेश किया जिनका सालाना टर्न ओवर करोड़ों रूपये था। एलडीए के इस साक्ष्य को देखकर न्यायालय ने भी बस्ती को अवैध मानकर बुल्डोजर चलाने का आदेश दे दिया। हालांकि इससे पहले अल्प आय वर्ग के कब्जेदारों का पुर्नवास सुनिश्चित करने की शर्त भी रखी।

भू-माफिया ने खड़ी की थी बहुमंजिला इमारतें और शोरूम

अकबर नगर में 2012 से 2017 तक सपा सरकार में संरक्षण प्राप्त भू-माफिया ने पर्यावरण संरक्षण के मानकों को दरकिनार कर कुकरैल नदी व बंधे पर कूटरचित दस्तावेजों से अवैध कॉलोनी बसाई थी। बहुमंजिला इमारतों के साथ अयोध्या रोड पर बड़े-बड़े शोरूम खड़े किए थे। भूमाफिया के हौसले इतने बुलंद थे कि गरीबों को भी ठगने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अवैध बस्ती बसा कर उनकी गाढ़ी कमाई लूट ली।

नदी के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण की योगी सरकार ने पहल की थी। इस क्रम में दिसंबर 2023 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने कुकरैल नदी और बंधे में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। उस दौरान भू-माफिया के इशारे पर अतिक्रमणकारियों ने खूब विरोध किया था। फिर भी योगी सरकार ने अपने फैसले पर अडिग होकर कार्रवाई जारी रखी और निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी।

रिहायशी एवं व्यावसायिक नहीं हो सकता निर्माण

नदी की जगह पर रिहायशी एवं व्यावसायिक निर्माण नहीं हो सकता है। इसके बाद भी 1068 आवासीय व 101 व्यावसायिक भवन बन गए। जिन्हें जीरो टॉलरेंस नीति के तहत योगी सरकार ने तोड़ने का आदेश दिया था। विरोध पर कोर्ट ने भी अकबर नगर में बसी बस्ती अवैध मानी थी और योगी सरकार की कार्रवाई को सही माना था। इस पर सोमवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के मानकों के आधार पर क्षेत्र को विकसित करने और कुकरैल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने कदम बढ़ा दिया है।

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