अयोध्या: फिल्मी कलाकारों के रामलीला मंचन का आधा सफर हुआ पूरा
अयोध्या। श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में मोक्षदायिनी सरयू के किनारे लक्ष्मण किला के मैदान में चल रही फिल्मी कलाकारों की रामलीला के मंचन को बुधवार को 5 दिन पूरे हो गए। कलाकारों की रामलीला ने अपना आधा सफर पूरा कर लिया। मंचन के पांचवें दिन सीता हरण,जटायु मोक्ष और शबरी संवाद का मंचन किया गया। …
अयोध्या। श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में मोक्षदायिनी सरयू के किनारे लक्ष्मण किला के मैदान में चल रही फिल्मी कलाकारों की रामलीला के मंचन को बुधवार को 5 दिन पूरे हो गए। कलाकारों की रामलीला ने अपना आधा सफर पूरा कर लिया। मंचन के पांचवें दिन सीता हरण,जटायु मोक्ष और शबरी संवाद का मंचन किया गया।
3 घंटे चले इस मंचन का दूरदर्शन समेत सोशल मीडिया के विभिन्न फलक पर लाइव प्रसारण हुआ।फिल्मी कलाकारों की रामलीला का आयोजन प्रदेश सरकार,संस्कृति मंत्रालय और अयोध्या शोध संस्थान के सहयोग से किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के सहयोग से दिल्ली के द्वारिका में फिल्मी कलाकारों की रामलीला आयोजित करने वाली संस्था मां फाउंडेशन रामलीला समिति की ओर से राम नगरी अयोध्या के लक्ष्मण किला मैदान में सरयू किनारे रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन से शुरू इस फिल्मी कलाकारों की रामलीला में पांचवें दिन सीता हरण, जटायु मोक्ष और शबरी संवाद का मंचन हुआ। सुसज्जित और तकनीक से लैस रामलीला के मंच पर मंचन की शुरुआत राम के बनवासी जीवन से होती है। मंच पर जंगल का दृश्य सजा हुआ है। भगवान राम की वन में सुतीक्षण से भेंट होती है। अगले दृश्य में अगस्त मुनि का आश्रम है।
जहां राम,लक्ष्मण,सीता मुनि का आशीर्वाद हासिल करते हैं। अगले पड़ाव में राम,सीता,लक्ष्मण भव्य पंचवटी में पहुंचते हैं और पंचवटी की शोभा निहारने लगते हैं। इसी दौरान शूर्पणखा की नजर राम पर पड़ती है और वह प्रणय निवेदन करती है। राम उसको काफी समझाते हैं,नाराज होकर लक्ष्मण सूर्पनखा की नाक काट देते हैं।
नाक काटे जाने से नाराज शूर्पणखा खर-दूषण के दरबार में जाती है और अपनी व्यथा सुनाती है। आक्रोशित खर-दूषण बदला लेने के लिए आते हैं लेकिन दोनों का वध हो जाता है। समाचार से कुपित शूर्पणखा रावण के दरबार में पहुंचती है और अपने साथ हुए कृत्य को बताती है। बदला लेने के लिए सीता अपहरण की योजना बनाई जाती है। मारीचि सोने जैसे हिरण का रूप धारण कर राम को अपने पीछे ले आता है।
मंच पर सुंदर कुटिया में सीता विराजमान है। सीता के ही कथन पर राम स्वर्ण जैसे हिरण का पीछा करते हुए शिकार को निकले हैं। इसी दौरान हे लक्ष्मण की आवाज सुनाई देती है। सीता और लक्ष्मण व्याकुल हो जाते हैं। लक्ष्मण भाई की मदद के लिए निकलते हैं हालांकि इसके पूर्व वह भाभी सीता की रक्षा के लिए कुटिया के सामने एक लक्ष्मण रेखा खींचते हैं और सीता को इस रेखा को पार न करने की हिदायत देते हैं।
लक्ष्मण के कुटिया से निकल जाने के बाद वेश बदलकर रावण साधु के भेष में प्रकट होता है और माता सीता से भिक्षा की मांग करता है। साधु देख माता सीता भिक्षा देने निकलती हैं और साधुभेष दारी रावण लक्ष्मण रेखा के बाहर निकलकर भिक्षा देने पर ही स्वीकार करने की बात कहता है। माता सीता साधु को नाराज नहीं करना चाहती और लक्ष्मण रेखा के बाहर निकल आती हैं।मंशा पूरी होते ही रावण सीता का अपहरण कर लेता है और लंका के लिए रवाना हो जाता है।
दृश्य बदलता है अपने विमान में रावण सीता को लेकर लंका जा रहा है। यह दृश्य देखकर जटायु राज माता सीता की मदद को दौड़ते हैं और रावण पर प्रहार करते हैं मगर बलशाली रावण के सामने जटायु राज की एक नहीं चलती और रावण जटायु राज को घायल कर देता है। इधर राम और भरत लक्ष्मण कुटिया वापस लौटते हैं तो सीता को वहां न पाकर व्याकुल हो जाते हैं। दोनों सीता की तलाश के लिए वन में भटकना शुरू कर देते हैं। पशु पक्षी पेड़ पत्थर सबसे सीता का पता पूछते हैं। रास्ते में जटायु राज मिलते हैं और सीता के अपहरण की बात बताते हैं। इसके बाद उनका मोक्ष हो जाता है।
एक बार फिर से फिल्मी कलाकारों के मंच का परिदृश्य बदल जाता है। एक कुटिया में माता शबरी बैठी हैं और सीता की खोज कर रहे राम और लक्ष्मण व्याकुल रूप में शबरी के आश्रम पहुंचते हैं। राम और लक्ष्मण को देख माता शबरी निहाल हो जाती हैं। इसके बाद राम और शबरी के बीच संवाद शुरू हो जाता है।भूख प्यास से व्याकुल राम को देख माता शबरी चिंता में पड़ जाती है और एक एक बेर चखकर राम और लक्ष्मण को खिलाती हैं।पूरे मंचन में बीच-बीच में कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शको को आह्लादित करते हैं और मंचन की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हैं।
