नहर के साथ बोरिंग भी नहीं दे रहा पानी, 25 प्रतिशत कम निकल रहा मेंथा में तेल
देवा/बाराबंकी, अमृत विचार। भीषण गर्मी के चलते जहां जनजीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वही नहरों में पानी न आने से मेंथा किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। किसानों की माने तो इतनी गर्मी के चलते बोरिंग ने पानी देना बंद कर दिया है और नहरों में पानी न आने से मेंथा की सिंचाई नहीं हो पा रही है। जिससे लोग मेंथा की फसल तैयार होने से पहले ही काट कर उसकी पेराई करने को मजबूर हैं।
देवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किस मेंथा की खेती करते हैं। नगदी फसल के रूप में जानी जाने वाली मेंथा की फसल को किसानों के लिए हरा सोना कहा जाता है। बीते एक माह से नहरों में पानी न आने से नहर के पानी से सिंचाई पर आश्रित मेंथा किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है हालांकि सिंचाई विभाग सोमवार तक नहरों में पानी आने की बात कर रहा है। भीषण गर्मी के चलते पंपिग सेट भी पानी देने से गुरेज करने लगे हैं। कई जगहों पर तो बोरिंग ने पानी निकालना भी बंद कर दिया है। जिससे किसानों की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है। किसानों की माने तो भीषण गर्मी के चलते इस बार सप्ताह में दो बार मेंथा की सिंचाई करनी पड़ रही है और पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर काफी ज्यादा लागत आ रही है। जिसके चलते किसान समय से पहले मेंथा की कटाई कर उसकी पेराई करने को मजबूर है कई किसान तो मेंथा की पराई भी कर चुके है जिसमे करीब 25 फीसदी तेल का नुकसान हुआ है रविवार को अमृत विचार संवाददाता ने देवा क्षेत्र के किसानों से बात की तो उनका दर्द छलक पड़ा। सिचाई विभाग के जेई बद्री विशाल कहते हैं कि बीते 15 मई से रूटीन के मुताबिक नहरों में पानी बंद हुआ था। जल्द ही नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा। सोमवार तक नहरों में पानी आ जाने की पूरी उम्मीद है।
बोले किसान, नहीं आ रही लागत
एक एकड़ में मेंथा की रोपाई की थी नहर के किनारे खेत होने के वावजूद निजी संसाधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है एक बार की सिंचाई में करीब 2000 रूपये का खर्च आता हैं।
शिवमंगल सिंह, सलारपुर।
अपने खेत में इस बार पांच बीघा मेंथा लगाई थी। जो सिंचाई के अभाव में सूखने की कगार पर है। जिससे चलते मेंथा की फसल में इस बार नुकसान ही होगा। बारिश हो नहीं रही हैं नहर में पानी नहीं है।
देशराज सिंह, नई बस्ती मजरे सालेहनगर।
इस बार करीब एक हेक्टेयर में मेंथा की फसल लगाई थी। जब मेंथा को सिंचाई की जरुरत थी तो नहर में पानी आना बंद हो गया। अब निजी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में लागत भी नहीं निकल रही है। -शैलेश रावत, ढिंढोरा।
तीन बीघा मेंथा लगाई थी, हर बार नहर से सिंचाई होती थी, लेकिन एक महीने से नहर सूखी पड़ी है। बोरिंग भी पानी नहीं दे रहा है। इसलिए समय से पहले ही मेंथा की पेराई कर ली है। जिसमे करीब 25 प्रतिशत तेल कम निकला है। -नन्हेलाल रावत, पासिनपुरवा देवा।
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