Bareilly News: बड़ा सवाल, किसके आदेश पर कानूनी प्रक्रिया को अनदेखा कर कब्जा दिलाने पहुंची पुलिस

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। मुख्य आरोपी राजीव राणा के मुताबिक कोर्ट के आदेश पर उसके पक्ष के लोग पुलिस को साथ लेकर प्लॉट पर कब्जा लेने पहुंचे थे लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कब्जा लेने के मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया और दूसरे पक्ष को बगैर सूचना दिए सुबह छह बजे अचानक तोड़फोड़ शुरू कर कब्जा लेने की कोशिश क्यों की गई।

दीवानी मामलों के अधिवक्ता अंतरिक्ष सक्सेना के मुताबिक किसी सिविल वाद में अंतिम निर्णय के बाद कब्जा लेने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत निष्पादन वाद प्रस्तुत करने का प्रावधान होता है। इसमें कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद कोर्ट अमीन को दखल परवाना जारी होता है। इस आदेश के बाद कोर्ट अमीन दखल परवाना लेकर डिक्री पाने वाले के साथ मौके पर जाते हैं। वहां अगर कोई विवाद होता है तो वापस आकर कोर्ट को रिपोर्ट देते हैं और कब्जा दिलाने के लिए पुलिस बल की मांग करते हैं। कितनी फोर्स चाहिए, रिपोर्ट में यह भी जिक्र होता है।

इसके बाद कोर्ट की ओर से एसएसपी को पुलिस बल मुहैया कराने का आदेश दिया जाता है। डिक्रीधारक को इसकी फीस भी जमा करनी पड़ती है। इसके बाद पुलिस फोर्स के साथ कोर्ट अमीन कब्जा दिलाते हैं। इस दौरान अगर कोई व्यवधान उत्पन्न होता है तो पुलिस उसका निपटारा करती है। 

पीलीभीत बाईपास पर प्लॉट पर कब्जा दिलाने के लिए ऐसी कोई प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सवाल उठ रहा है कि अगर वाकई कोर्ट ने आदेश जारी किया था, पुलिस ने इस कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी क्यों की और किसके आदेश पर दूसरे पक्ष को सूचना दिए बगैर सीधे कब्जा दिलाने पहुंच गई।

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