बाराबंकी: जमुरिया की जद में आये परिवारों ने उठाई मुआवजे की मांग, महिलाएं बोलीं- कांशीराम आवासों में नहीं हो पाएगा गुजर बसर
युद्ध स्तर पर चल रहा नाले की सफाई का काम, बारिश से पहले होगा पूरा, नाले पर कई स्कूलों का अवैध अतिक्रमण भी होगा ध्वस्त
बाराबंकी, अमृत विचार। कमरिया बाग में यंग स्ट्रीम स्कूल के पास जमुरिया नाले की सफाई का काम काफी तेज रफ्तार से चल रहा है। जिला प्रशासन बारिश शुरू होने से पहले जमुरिया नाले की सफाई का काम हर हाल में पूरा कराने की पूरी कोशिश में है। सफाई कार्य समय सीमा के अंदर खत्म कराने के लिये अब नाले के दोनों छोरों पर चार पोकलेन मशीनें लगातार काम कर रही हैं।
वहीं जिन लोगों के अवैध निर्माण नाले की जद में आए हैं, वह लोग खुद अपना अतिक्रमण हटा रहे हैं। इससे प्रशासन को बड़ी राहत मिली है। नाले की जमीन पर हुए निर्माण को ढहाने के साथ ही इससे प्रभावित लोगों को प्रशासन कांशीराम कॉलोनी में शिफ्ट करवा रहा है। हालांकि पश्चिमी पीरबटावन मोहल्ले में कुछ लोग कांशीराम आवास में नहीं जाना चाहते। वह प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। जिससे नई जगह पर दोबारा घर बनवा सकें।

वहीं छाया चौराहे के पास स्थित पुल तक नाले की सफाई पूरी होने के बाद जिला प्रशासन आगे का कार्य शुरू कराएगा। आगे नेहरू नगर, लखपेड़ाबाग और आवास विकास समेत अन्य मोहल्लों में अवैध निर्माणों को लोग अभी से ही गिराना शुरू कर चुके हैं। 25 मीटर की परिधि में लखपेड़ाबाग स्थित श्री साईं इंटर कॉलेज, महारानी लक्ष्मी बाई इंटर कॉलेज, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, पायनियर डिग्री कॉलेज और आनंद विहार इंटर कॉलेज का भी हिस्सा आ रहा है। जिसे भी अभियान के अगले चरण में हटवाया जाएगा।
आवास नहीं मुआवजा मिले
पश्चिमी पीरबटावन में मदरसे के आस पास जिन लोगों के घर नाले की जद में आये हैं, वह अपनी रजिस्ट्री दिखाकर अधिकारियों के सामने अपना दुखड़ा रो रहे हैं। आंखों में आंसू भरे मेहरुल निशा और राफिया बानो समेत अन्य महिलाओं ने बताया कि वह लोगों के घरों में जाकर बर्तन धुलने और साफ सफाई का काम करती हैं। अगर यह जगह अवैध थी तो उनको रजिस्ट्री और दाखिल खारिज क्यों किया गया। रजिस्ट्री के समय उन्हें प्रशासन बता देता कि यह जगह अवैध है, तो वह अपने घर क्यों बनवाते। किसी तरह से पेट काट काटकर उन लोगों ने अपने घरों को बनाया। अब जब रहने का समय आया तो हमारे घरों को अवैध बताकर गिरवाया जा रहा है। घरों के टूटने के बाद कांशीराम कॉलोनी में पट्टा मिलने पर इन लोगों ने कहा कि वह अपना सामान, बच्चों और पूरे परिवार को लेकर उस छोटी जगह में कैसे गुजर बसर करेंगे। यह परिवार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उनको घरों के बदले उन्हें रेट के मुताबिक मुआवजा दिया जाए। जिससे वह नई जगह पर जाकर अपने घर बनवा सकें और परिवार पाल सकें।

मदरसे का हिस्सा टूटा
कमरियाबाग श्मसान घाट के पास पश्चिमी पीरबटावन में प्राइवेट मदरसा इस्लामिया स्थित है। जिसका नाले की तरफ आ रहा अवैध हिस्सा भी टूट चुका है। मदरसे की छत और बाकी दीवारें बल्लियों के सहारे रोकी गई हैं। यहां के लोगों का कहना है कि नाले की तरफ की दीवार टूटने के बाद मदरसे में मजबूती नहीं बची। सफाई का काम खत्म होने के बाद दीवारें खड़ी करके मदरसे की छत को रोका जाएगा। पश्चिमी पीरबटावन के सभासद आदिल अंसारी ने बताया कि मदरसे में कुछ बच्चे तालीम हासिल कर रहे थे। जल्द ही मदरसे को सही करवाया जाएगा। जिससे उन बच्चों की तालीम यहां दोबारा शुरू कराई जा सके। सभासद आदिल अंसारी ने कहा कि हम सभी जिला प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं।
बनने से पहले ही टूटने की बारी
मोटरसाइकिल मकैनिक का काम करने वाले वाजिद अली और उनकी पत्नी रहीसा बानो ने अफीम कोठी के पीछे नाले के एकदम बगल अभी अपना नया मकान खड़ा ही किया है। खून पसीने की कमाई से बनाए मकान पर अभी प्लास्टर तक नहीं करवा सके हैं। लेकिन प्रशासन ने उसके लगभग आधे हिस्से को तोड़ने का निर्देश दिया है। वाजिद अली ने बताया कि उन्होंने जो जमीन खरीदी थी, वह नाले से थोड़ा दूर थी। लेकिन बगल के लोगों ने हमारा मकान वहां नहीं बनने दिया और हमरी जमीन को खिसकाकर नपवा दिया। लोगों के दबाव के आगे हम लोग उस समय कुछ बोल नहीं सके। उसी का नतीजा हुआ कि हमारा मकान जो अभी पूरी तरह से बन भी नहीं पाया उसे तोड़ने की बारी आ गई। अब हम खुद अपने घर को तोड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि अभी वह किराये के मकान में रह रहे थे। जिसके चलते उन्हें आवास भी नहीं दिया जा रहा।
क्या बोले एसडीएमस सदर
बीते साल शहर में आई बाढ़ की बड़ी वजह जमुरिया नाले पर किया गया अतिक्रमण था। इसी को देखते हुए हम लोग 25 मीटर की परिधि में नाले का सफाई का कार्य करवा रहे हैं। जिसमें बीस मीटर नाले की खुदाई। नाले के दोनों तरफ ढाई-ढाई मीटर नाले का मलबा रखवाया जा रहा है। इस कार्य में कुल 171 मकान प्रभावित हुए हैं। जिनमें 43 मकान पूरी तरह से ध्वस्त कराये जा रहे हैं। जिनके परिवारों को कांशीराम कॉलोनी में शिफ्ट किया जा रहा है। 30 मकानों के आंशिक निर्माण नाले की जद में आये हैं। जिन्हें लोग खुद तोड़ रहे हैं..., बिजय कुमार त्रिवेदी, एसडीएमस सदर।
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