पीलीभीत: SDM ने निस्तारण की दी जिम्मेदारी, लेखपाल ने शुरू कर दिया भ्रष्टाचार..एंटी करप्शन ने भेजा जेल
पीलीभीत, अमृत विचार। एक दिन पूर्व बरेली से आई एंटी करप्शन टीम की ओर से सदर तहसील के लेखपाल सौरभ गंगवार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ की गई धरपकड़ ने जहां एक तरफ निचले स्तर पर सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। वहीं, संपूर्ण समाधान दिवस में चक्कर लगाकर न्याय के लिए परेशान होने वाले फरियादियों की तकलीफ की वजह की ओर भी इशारा कर दिया है।
एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक सुनील कुमार की ओर से सदर कोतवाली में आरोपी लेखपाल के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर तो इसी ओर इशारा कर रही है। यह भी सवाल उठा दिए हैं कि फरियादियों की समस्या के निस्तारण को दिए गए शिकायत पत्रों पर किस तरह से रिश्वतखोरी का खेल शुरू कर दिया गया। फिलहाल एसडीएम ने उसे निलंबित भी कर दिया है।
बता दें कि बरेली से आई एंटी करप्शन की टीम ने शुक्रवार दोपहर सदर तहसील के लेखपाल सौरभ गंगवार को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा था। सदर तहसील के बाहर एक पान की दुकान पर ग्रामीण से रिश्वत लेते गिरफ्तारी की गई और शनिवार को उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। ये पूरा खेल शासन का महत्वाकांक्षी फरियादियों को न्याय दिलाने के लिए चलाए जा रहे संपूर्ण समाधान दिवस से जुड़ा है।
एंटी करप्शन के निरीक्षक सुनील कुमार की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता ग्राम कोहना के रामलखन कश्यप को 30 जून 2023 को कुंवरपुर गांव स्थित तालाब गाटा संख्या 127 रकवा 1.254 हेक्टेयर का पट्टा दस साल के लिए एसडीएम सदर द्वारा किया गया था। 15 जून 2024 को संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान एसडीएम सदर के सामने ग्रामीण पेश हुआ और तालाब पर बाड़ लगाने के लिए भूमि की पैमाइश कराने से जुड़ा प्रार्थना पत्र सौंप दिया।
एसडीएम सदर ने आरोपी लेखपाल को प्रार्थना पत्र दे दिया। कहा था कि लेखपाल से मिलना। संपूर्ण समाधान दिवस समाप्त होने के बाद वह लेखपाल से मिले तो उसने सीधे 45 हजार रुपये की रिश्वत मांग ली। आर्थिक स्थिति कमजोर होने का हवाला दिया तो कह दिया कि 35 हजार रुपये दिए बिना तो काम नहीं हो सकेगा। ये कहने लगा कि 15 हजार रुपये पहले दे देना और काम होने के बाद 20 हजार रुपये देने होंगे।
कई चक्कर लगाने के बाद भी बिना रिश्वत के लेखपाल इस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करने के लिए राजी ही नहीं था। परेशान होकर मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन बरेली इकाई के कार्यालय जाकर कर दी गई और रंगेहाथ लेखपाल पकड़ा गया। इस घटना से भ्रष्टाचार तो उजागर हो ही गया है। वहीं सवाल ये है कि अब आगे इस तरह के रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों पर शिकंजा कसना अफसरों के लिए भी चुनौती बना है। फिलहाल लेखपाल की धरपकड़ के बाद दूसरे दिन भी राजस्व कर्मियों में खलबली मची रही।
पांच दिन में अंजाम तक पहुंच गई कार्रवाई
रिश्वत की डिमांड करने वाले लेखपाल की शिकायत और कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाने में महज पांच दिन लगे। 24 जून को ही ग्रामीण ने बरेली पहुंचकर एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी। उसी दिन शिकायतकर्ता के बयान लिए गए। गोपनीय जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट 25 जहून को एंटी करप्शन के निरीक्षक आनंद कुमार वर्मा ने दे दी, जिसमें लेखपाल को भ्रष्ट और शिकायतकर्ता के आरोपों को सही बताया गया था। फिर अधिकारियों से मंथन चलता रहा और 27 जून को टीम गठित हो गई। फिर 28 जून को टीम ने रंगेहाथ लेखपाल को धर दबोचा।
कलेक्ट्रेट के दो कर्मचारी बनाए गए गवाह
28 जून को बरेली से एंटी करप्शन की टीम सुबह सवा आठ बजे से बरेली से चलकर पीलीभीत आ गई। डीएम कार्यालय से 300 मीटर की दूरी पर टीम और वाहन छोड़ सिर्फ दो निरीक्षक आगे गए। डीएम से मिलकर गोपनीय पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद दो लोकसेवक साक्षी मांग। इस पर संपत्ति न्यायिक सहायक संदीप कुमार और एसी द्वितीय कांता प्रसाद को साथ लिया। शिकायतकर्ता, दोनों कर्मचारियों को साथ लेकर टीम माधोटांडा रोड पर एक पेट्रोल पंप के पास रूकी रही और सभी का आपस में परिचय कराकर प्लानिंग बताई। रिश्वत में देने वाले रुपये का बंडल भी यहीं तैयार किया गया था। जिसमें 500 के 30 नोट रखे गए थे। जिनके नंबर भी पहले ही नोट कर लिए थे।
लेखपाल का रिश्वत लेने के लिए ठिकानों का समय भी था निश्चित
बताते हैं कि आरोपी लेखपाल सौरभ गंगवार ने रिश्वत लेने के लिए अपने ठिकानों को समयवार निश्चित कर रखा था। ग्रामीण से कहा गया था कि सुबह नौ बजे तक आओगे तो छतरी चौराहा के पास मोहल्ला नई बस्ती स्थित मकान पर मिलेगा। इसके बाद सदर तहसील में ही रुपये ले लेगा। इतना ही नहीं लेखपाल को रुपये देने के लिए पीड़ित से मुलाकात पहले सदर तहसील के भीतर कक्ष में ही की गई थी। फिर नीचे पान की दुकान पर पहुंचने के लिए कह दिया गया था। जहां टीम ने उसे पकड़ लिया। उसके पास से टीम को 12880 रुपये अगल से भी मिले थे।
एक निजी स्कूल में बुलडोजर लेकर पहुंचने पर भी रहा था चर्चा में
रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ने के बाद एंटी करप्शन टीम द्वारा पकड़े गए आरोपी लेखपाल सौरभ गंगवार इससे पहले भी एक मामले में चर्चित रहा था। टीम के साथ टनकपुर हाईवे पर एक निजी स्कूल में बुलडोजर लेकर पहुंचा था। सरकारी भूमि कब्जाने का आरोप स्कूल प्रबंधन पर लगाते हुए कार्रवाई की तैयारी थी। हालांकि बाद में बैरंग लौटना पड़ा था। टीम के बिना कार्रवाई लौटने पर भी तमाम चर्चाएं तेज रही थी।
आरोपी लेखपाल निलंबित, होगी जांच: एसडीएम
एंटी करप्शन टीम की ओर से एक दिन पहले लेखपाल सौरभ गंगवार को रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया है। आरोपी लेखपाल पर कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया गया है। उसकी विभागीय जांच भी कराई जाएगी- देवेंद्र सिंह, एसडीएम सदर
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