कासगंज: ठेकेदार और सिंचाई विभाग की मनमानी से बोझिल सरकारी कंधे, दो करोड़ का बढ़ा अतिरिक्त बोझ
गजेंद्र चौहान, कासगंज। मनमानी और लापरवाही के अलावा भ्रष्टाचार की बानगी देखनी है तो एक बार बाढ़ के दौरान सिंचाई विभाग की गहराई तक पहुंच कर देखिए। जहां न जाने पर्दे के पीछे क्या-क्या खेल होते रहते हैं? बाढ़ आने से पहले बाढ़ और कटान रोकने के लिए प्रस्ताव भेजे जाते हैं। उन्हें मंजूरी मिलती है। उन पर काम शुरू होते हैं, लेकिन हर साल फिर से कार्य बाढ़ के दौरान पानी में बह जाते हैं। फिर मजबूरन ठेकेदारों से उधारी पर काम कार्य कराकर सिंचाई विभाग आपातकाल कार्य दिखाकर शासन से धनराशि मांगता है।

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। बल्कि, लंबे समय से यही होता चला रहा है। इसे विशेषज्ञ सोची समझी साजिश भी मानते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है और दो करोड़ रुपए अतिरिक्त बोझ के तले सरकारी कंधे दब गए। सरकारी खजाने से अब दो करोड़ रुपए सिंचाई विभाग लेने को आतुर दिखाई दे रहा है। हालांकि, रुपए लेने से पहले उधारी में ठेकेदार से काम कराए जा रहे हैं।
बरौना में सुरक्षा की मजबूत दीवार करने की जिम्मेदारी बीते साल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सौंपी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि अगली बार बाढ़ के दौरान बरौना गांव को बाढ़ छू भी न पाए। इस तरह के मजबूत पक्के कार्य कराए जाएं और यहां कटान रोका जाए। इसको लेकर 7.30 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता का प्रस्ताव था, इसलिए सबसे पहले मंजूरी मिली तो धनराशि भी मिल गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर सिंचाई विभाग ने एक दागदार ठेकेदार को कार्य दे दिया, जिसने बाढ़ की शुरुआत से पहले ही कराए गए कार्यों से ग्रामीणों की धड़कन बढ़ा दी। हल्की सी बाढ़ में ही कटान शुरू हो गया।
इसको लेकर जिला प्रशासन सख्त हुआ। शासन स्तर से भी निगरानी हुई। कार्रवाई का डर जिम्मेदार अधिकारियों को सता रहा है। इस बीच यह भी पाया गया है कि ठेकेदार ने बड़ी लापरवाही की और जिस मजबूत सामग्री का प्रयोग किया जाना चाहिए था वह नहीं किया, जिसके कारण अब दो करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्चा आ सकता है।
बरौना में यह की है तैयारी
-1.25 लाख बोरियों से कटान रोकने की तैयारी
-04 सहायक अभियंता बाढ़ रोधी कार्य में जुटे
-12 अवर अभियंता की निगरानी में कार्य हो रहा है
औपचारिकता से तैयार की सुरक्षा की दीवार
सुरक्षा की दीवार बनाने में गेबियन रोप मे भरकर बोरियां लगाई जाती हैं। इस कार्य मे प्रयुक्त गेबियन रोप काफी महंगी आती है। पहले तो सिंचाई विभाग के ठेकेदार ने इस रोप का प्रयोग नहीं किया, लेकिन अब जब कार्रवाई में घिरता नजर आ रहा है तो यह रोप मंगाया जा रहा है, लेकिन इसमें भी अधिकारियों ने नया तोड़ निकाल लिया। आपातकालीन कार्य दिखाकर प्रस्ताव को मिली स्वीकृति से मिले धन से यह कार्य नहीं कराया जाएगा। बल्कि, ठेकेदार के माध्यम से उधारी में कार्य कराकर विभाग नए सिरे से दो करोड़ रुपए मांगेगा। इस तरह 2 करोड़ रुपए से सरकार को चूना लगने जा रहा है। इससे पहले भी ऐसा ही होता रहा है।
आखिर किस लालच में कार्य करते हैं ठेकेदार
तीन साल पहले 40 लाख रुपए से उधारी में ठेकेदारों ने कार्य किया। दो साल पहले फिर लगभग 45 लाख रुपए से उधारी में कार्य किया। पिछले साल भी लाखों रुपए के कार्य उधारी में किए गए। इन वर्षों का रुपया अभी तक शासन से नहीं मिला है। ठेकेदारों ने कई बार मांग भी की है। अब इस बार फिर उधारी में काम कराने की तैयारी है। इस बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर ठेकेदार किस लालच में उधारी में काम करने को तैयार हो रहे हैं।
ठेकेदार भवर सिंह द्वारा साढ़े तीन करोड़ की लागत से बने बांध की बोरियां लगाकर मरम्मत कराई जा रही है। इसके अलावा आपातकाल कार्य भी कराया जा रहा है। इस कार्य से प्रस्ताव के कार्यों का कोई लेना-देना नहीं है। यह कार्य ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है और बाद में शासन से भुगतान कराया जाएगा। -शेर सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई
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