डर व तनाव ही बनता है कैंसर का कारण, वैज्ञानिक डॉक्टर अजय सोनकर ने साझा की अपनी स्टडी
प्रयागराज, अमृत विचार। आज इंसान डरा हुआ है, डर की वजह से तनाव है। डर और तनाव की वजह से ही इंसान कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रहा है। पद्मश्री वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सोनकर ने मनुष्यों में होने वाली बीमारियों पर कई साल अध्ययन करने के बाद ये बात कही।
डॉ. अजय ने बताया कि जब कोई तनाव में आता है तो शरीर की रक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया देती है, जिसके तहत एड्रनल ग्लैंड में कॉर्टिसोल हॉर्मोन उत्पन्न होता है। यह पाचन तंत्र, प्रजनन अंग, पैन्क्रिया जैसे तमाम अंगों को अस्थाई रूप से निष्कृिय करके खून में सामान्य से कई गुना अधिक ग्लूकोज संग्रहित कर देता है। शरीर को ग्लूकोज का उपयोग करने के लिए उसी अनुपात में कई गुना ज्यादा आक्सीजन की जरूरत होती है। ऑक्सीजन एरोबिक व्यायाम से ही मिल सकता है। इसके लिए कड़ा श्रम या दौड़ना जरूरी है। आज की विकृत जीनवशैली में इंसानों से यही नहीं हो पा रहा है।
वैज्ञानिक के मुताबिक खून में बढ़ा ग्लूकोज इस्तेमाल नहीं हो पाता और इससे वसा की मात्रा बढ़ जाती है। यही हृदय रोग की बीमारी का कारण बनता होता है। पैन्क्रियाज के बीटा कोशिकाओं पर क्षमता से कहीं अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिसके कारण वह ठीक से काम नहीं कर पार्टी और व्यक्ति को मधुमेह जैसी बीमारी भी जकड़ने लगती है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण नान-सेलुलर नामक परिस्थिति उत्पन्न होती है, जिसके कारण कोशिका में मौजूद ग्लूकोज फरमेंट हो जाती है। ऐसी कोशिकाओं का आवरण शख्त हो जाता है। ऐसी कोशिकाओं में न तो ऑक्सीजन जा सकता है न अपव्ययी पदार्थ बाहर निकल सकता है। ऐसी कोशिकाओं को ही मैलिग्नेंट या कैंसर का सेल कहा जाता है।
अल्पकालिक, दीर्घकालिक तनाव और पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस के लिए डॉ. अजय आज की व्यवस्था को दोषी मानते हुए कहते हैं कि जीवन में असुरक्षा और डर के साये में जीने की सभी की आदत हो गई है। उत्पाद का प्रचार और सनसनीखेज समाचार भी लोगों में डर पैदा कर रहे हैं।
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