बदायूं: मकान खाली करने के बाद भी बिजली विभाग ने निकाली रिकवरी, कोर्ट ने की निरस्त...जानिए मामला

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Edited By Amrit Vichar
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साल 2019 में मकान खाली करने के बाद भी बिजली विभाग ने बताया बकाया

बदायूं, अमृत विचार। किराए पर लिया गया मकान खाली करने के बाद भी बिजली विभाग ने एक व्यक्ति पर बिजली बिल के एक लाख 98 हजार 817 रुपये और शमन शुल्क के 20 हजार रुपये दर्शाए। व्यक्ति ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। कोर्ट ने दोनों पक्ष सुनने के बाद बिजली विभाग की ओर से दिखाई गई रिकवरी शून्य कर दी है। रिकवरी आरसी को निरस्त कर दिया है। व्यक्ति से बिल के रुपयों की रिकवरी नहीं की जाएगी।

शहर के कल्याण नगर निवासी संजय सक्सेना पुत्र सुरेश चंद्र सक्सेना ने कोर्ट में यूपी पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने बताया कि वह 5 अक्टूबर से हरप्रसाद मंदिर के सामने वाले भवन में ट्रेनिंग सेंटर चलाते थे। जिसका बिजली कनेक्शन लिया था। जो भी बिल आता था वह समय पर जमा कर देते थे। ट्रेनिंग सेंटर में आय-व्यय के असंतुलन की वजह से उन्होंने सेंटर बंद कर दिया और मकान भी खाली कर दिया था। 

21 जुलाई 2019 को मकान मालिक को मकान पर कब्जा दे दिया। साथ ही बिजली कनेक्शन बंद करने के लिए बिजली विभाग को प्रार्थना पत्र दिया। कर्मचारियों ने रिसीविंग देने से मना किया और बिजली कनेक्शन कटवाने के लिए 5000 रुपये मांगे। उन्होंने रुपये नहीं दिए। जिसके बाद वह बिजली विभाग के कार्यालय के चक्कर लगाते रहे लेकिन कनेक्श नहीं काटा गया। 

साल 2019 से उस मकान में डॉ. संघमित्रा मौर्य का कार्यालय खुल गया। 2 नवंबर 2022 को बिजली विभाग के एक कर्मचारी का फोन आया कि उनपर 15 हजार रुपये का बिल बकाया है। जल्द जमा कराएं वर्ना कार्रवाई की जाएगी। संजय ने दो दिन बाद रुपये जमा करा दिए। 30 सितंबर 2023 को एंटी पॉवर थेफ्ट की ओर से उनके पास फोन आया और बताया कि उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। जिसमें उनपर बिजली बिल के एक लाख 84 हजार 889 रुपये और शमन शुल्क के 20 हजार रुपये दर्शाए गए हैं। 

उन्होंने जनसेवा केंद्र पर जाकर जानकारी की तो पता चला कि विभाग ने उनपर एक लाख 98 हजार 817 रुपये दर्शाया है जबकि उन्होंने 2019 के बाद से बिजली का प्रयोग नहीं किया। बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश कुमार की ओर से कोर्ट में पक्ष रखकर बताया कि बिजली चेकिंग के दौरान संजय सक्सेना के भवन में कटिया डालकर बिजली चलती मिली थी। जिसके चलते 26 मार्च 2021 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 

लाइनमैन न होने की वजह से कनेक्शन नहीं काट सके थे। न्यायालय स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष काली चरन, सदस्य राकेश कुमार रस्तोगी व स्वदेश कुमारी ने दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद बिजली विभाग की ओर से दिखाए जा रहे बिल के बकाया एक लाख 98 हजार 817 रुपये और शमन शुक्ल के 20 हजार रुपये की रिकवरी नहीं की जाएगी। कोर्ट ने रिकवरी की धनराशि शून्य कर दी है।

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