लखीमपुर खीरी: कांवड़िए के शव का परिजनों ने रोका अंतिम संस्कार, दौड़े अफसर

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Edited By Amrit Vichar
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लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। सड़क हादसे में मारे गए कांवड़िए का शव पोस्टमॉर्टम के बाद जब थाना सिंगाही के उसके गांव ऐली पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण उसके घर पर पहुंच गए। वहीं परिजनों ने शव की अंतेष्टि करने से मना कर आर्थिक मदद और वाहन को बरामद कर आरोपी चालक की गिरफ्तारी की मांग करने लगे।

सूचना पाकर नायब तहसीलदार और प्रभारी निरीक्षक फोर्स के साथ गांव पहुंचे। नायब तहसीलदार ने परिवार वालों को ढांढस बंधाया और उन्हें आश्वासन दिया। तब जाकर परिजन माने और शव की अंतेष्टि की।

दरअसल, गांव ऐली से कांवड़ियों की एक टोली छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ जलाभिषेक करने जा रही थी। शनिवार को रात अधिक होने पर सभी कांवड़िए थाना फरधान क्षेत्र के एक कॉलेज में ठहर गए। कांवडियों के दल में शामिल गांव का बीरबल (45) रविवार की तड़के करीब तीन बजे लघुशंका के लिए गया था। इसी बीच पीलीभीत-बस्ती हाईवे पर किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी मौत हो गई।

पोस्टमॉर्टम के बाद सोमवार को उसका शव गांव लाया गया। शव पहुंचते ही परिवार में चीख पुकार मच गई। तमाम ग्रामीणों की भीड़ भी मृतक के घर पर जुट गई। इस दौरान साथी कांवडियों और परिवार वालों ने आर्थिक सहायता के साथ ही हादसा करने वाले वाहन और उसके चालक की गिरफ्तारी की मांगों को लेकर शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।

इसकी जानकारी होते ही प्रभारी निरीक्षक सिंगाही अमित कुमार भदौरिया और नायब तहसीलदार हरिराम फोर्स के साथ गांव पहुंचे, जहां पीड़ित परिवार से बातचीत की। नायब तहसीलदार ने हरसंभव सरकारी मदद और सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। तब परिजन मान गए और शव का पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

परिजनों और कांवड़ियों की टोली को समझा कर प्रशासन की निगरानी में अंतिम संस्कार करा दिया गया है। सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता की धनराशि कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद मृतक के परिजनों के खाते में भेजी जाएगी। -हरिराम, नायब तहसीलदार, निघासन

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