प्रयागराज: अंतरराष्ट्रीय आपराधिक मुकदमों के निस्तारण के लिए एक वैश्विक कानूनी ढांचे की आवश्यकता-HC
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय व्यापार में लगे विदेशी नागरिकों के आपराधिक मुकदमों से निपटने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में विदेशी नागरिकों की बढ़ती उपस्थिति और उनके आपराधिक मुकदमों से उत्पन्न जटिलताओं को देखते हुए, ऐसे मामलों को निष्पक्ष और कुशलतापूर्वक निपटाने के लिए एक वैश्विक कानूनी ढांचे की आवश्यकता है। अपने 33 पृष्ठ के आदेश में कोर्ट ने इस पर जोर दिया कि भारतीय संविधान और कानून के शासन को बनाए रखना सर्वोपरि है। इस उद्देश्य के लिए विदेशी व्यवसायों और व्यक्तियों को भारतीय कानूनों का पालन करना चाहिए और भारतीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अधीन होना चाहिए।
इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि विदेशी नागरिकों को छूट देने से भारत की संप्रभुता और संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचेगा। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकलपीठ ने भारत में एक अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क संचालित करने, अपने वीजा की अवधि से अधिक समय तक रहने तथा विभिन्न गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोपी चीनी अधिकारी रयेन उर्फ रेन चाओ को जमानत देने से इनकार करते हुए की। अभियुक्त के खिलाफ आईपीसी, विदेशी अधिनियम और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस स्टेशन बीटा-2, गौतम बुध नगर में मामला दर्ज करवाया गया था। हालांकि याची का नाम प्राथमिकी में नहीं था, लेकिन जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को याची के खिलाफ कई आपत्तिजनक साक्ष्य मिले, जिससे विभिन्न अपराधों में याची की संलिप्तता पाई गई।
याची कथित तौर पर शेन्ज़ेन ल्यूकीन इलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड के लिए वर्क वीज़ा पर भारत आया था, लेकिन वहां काम न करके उसने अवैध रूप से एचटीजेडएन नामक एक कंपनी के लिए काम किया, जो अवैध चिप निर्यात, गेमिंग ऐप्स के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग और भारतीय निवेशकों को धोखा देने सहित कई आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थी। उनकी जमानत याचिका नवंबर 2022 में ट्रायल कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि विदेशी नागरिक लागू कानूनों और शर्तों के अनुसार जमानत मांगने के हकदार है। चूंकि याची ने वीजा शर्तों का उल्लंघन किया है, वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह देश में रुका है तथा देश में आपराधिक गतिविधियां संचालित करता रहा है, इसलिए जमानत पर रिहा होने पर उसके उपरोक्त घृणित गतिविधियों में संलिप्त होने तथा देश से पलायन की प्रबल संभावना है। अतः कोर्ट ने याची को जमानत देने से इनकार कर दिया।
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