बहराइच: 35 साल बाद हत्या अभियुक्त हुआ दोषमुक्त, अर्से से लंबित चल रहा था मुकदमा...जानें मामला
लीगल एंड डिफेंस काउंसलिंग सिस्टम के तहत अभियुक्त की हुई नि:शुल्क पैरवी
बहराइच, अमृत विचार। न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने शुक्रवार को अति प्राचीन 35 साल पुराने विचाराधीन मुकदमें में निरूद्ध हत्या के एक अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया है। अभियुक्त को लाीगल एंड कांउसलिंग सिस्टम के तहत महज ढाई महीने में नि:शुल्क पैरवी कर दोषमुक्त करार दिया गया है।
जनपद लखीमपुर खीरी के थाना निघासन क्षेत्र के ग्राम लोलियनपुरवा निवासी अभियुक्त घड़ीराम हत्या के मामले में उसका मुकदमा 35 साल से विचाराधीन चल रहा था। इस दौरान अभियुक्त की जामनत तो हुई, लेकिन उसके बाद वह पेशी में न पहुंचने के चलते वारंट जारी कर उसको जेल भेज दिया गया था। अभियुक्त काफी गरीब व असहाय था। उसकी पैरवी करने वाला कोई नहीं था। वह काफी समय से जेल में निरूद्ध था।
ऐसी स्थित में अभियुक्त की ओर से विधिक सहायता के लिए ढाई माह पूर्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में अर्जी दी गई थी। जिसका संज्ञान लेते हुए प्रधिकरण के सचिव व अपर जिला जज विरोट शिरोमणि ने मुकदमें में अभियुक्त की पैरवी करने के लिए चीफ लीगल डिफेंस काउंसिल मुन्नूलाल मिश्रा की अगुवाई में टीम की नियुक्ति की थी। प्रचाीन मुकदमें के विचारण को प्राथमिकता के आधार पर न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा द्वितीय की कोर्ट पर टीम ने मुदकमें में पैरवी करते हुए ढाई माह में सुनवाई पूरी करते हुए कोर्ट ने शुक्रवार को अभियुक्त को दोषमुक्त कर रिहा करने का आदेश जारी किया है।
बता दें कि दीवानी न्यायालय के विभिन्न कोर्ट पर ऐसे कई मामले विचाराधीन चल रहें हैं, जिनके मुकदमों के अभियुक्त के परिजन नहीं हैं। परिजनों के आभाव में उनके मुकदमों की पैरवी नहीं हो पा रही थी। मामले में जिला विधिक प्राधिकरण अध्यक्ष व जनपद न्यायाधीशी उत्कर्ष चतुर्वेदी के प्रयासों के बाद प्राधिकरण के तत्वाधान में लीगल डिफेंस काउंसलिंग सिस्टम की स्थापना की गई थी। कांउसलिंग सिस्टम की टीम में मुन्नूलाल मिश्रा को चीफ मनोनीत कर डिप्टी एलएडीसी फिरोज अहमद खां, प्रशांत शुक्ला, ऋषभ पाठक को मनोनीत किया गया था।
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