बहराइच: सरकार के लाखों रुपये देने के बाद भी समितियों पर नहीं पहुंच रही खाद, जानें मामला
समिति संचालन के लिए प्रतिवर्ष पांच वर्ष पर सरकार देती थी पांच लाख
बहराइच, अमृत विचार। जिले में स्थित सहकारी समितियों के संचालन के लिए सहकारिता विभाग की ओर से पांच से 10 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी बजट के अभाव में खाद समितियों तक नहीं पहुंच रही है। सोसाइटी के पास बजट ही नहीं है। ऐसे में बजट के सदुपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। लाखों रुपये मिलने के बाद भी खाद की खरीद समय से न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। जिले में 111 सहकारी समितियों का संचालन होता है।
इन समितियों से किसानों को डीएपी, यूरिया खाद मिलती है। इसके संचालन के लिए सरकार की ओर से पांच लाख रुपये समिति के सचिवों के नाम दी जाती है, इस बजट से खाद की खरीद कर किसानों को दिया जाए। लेकिन बोवाई के समय ही जिले में एक माह से खाद को लेकर हाय तौबा मची हुई है।
कृषि विभाग सचिवों पर खाद उठान का जिम्मा होने की बात कहता है। जबकि सचिव समय से खाद का उठान केएफसी गोदाम से नहीं कर रहे हैं। इसका मतलब है कि सरकार द्वारा भेजे जा रहे बजट को बंदरबांट कर दिया गया है। हालांकि यह अभी जांच का विषय है। लेकिन सरकार द्वारा दिए जा रहे रूपये कहां लगाए जा रहे हैं, इसको लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
अभी एक सप्ताह पहले ही मांग के सापेक्ष खाद नहीं मिल रही थी। जिसमें रूपये की कमी और सचिव द्वारा खाद न खरीदने का मामला प्रकाश में आया है। मालूम हो कि नेपाल में खाद की तस्करी न हो, इसके लिए सरकार की ओर से समिति के सचिव के नाम से पांच पांच लाख रुपये जारी किया जा रहा है। लेकिन किसी भी समिति पर सचिव की ओर से पांच लाख रुपये का खाद खरीदकर नहीं रखा जा रहा है। जिसका खामियाजा किसान भुगतते हैं।
पांच के स्थान पर हुआ 10 लाख
समिति संचालन के लिए पहले सरकार की ओर से पांच लाख रुपये दिया जाता था। लेकिन अब इसे बढ़ाकर केसीसी के रूप में परिवर्तित कर 10 लाख कर दिया गया है। इसके बाद सोसाइटी के पास भुगतान न होना कई सवाल खड़े करता है। बिक्री के कमीशन की राशि ही सचिवों को वेतन के रूप में मिलना है।
सभी केंद्रों पर पहुंच गए खाद
बीते सप्ताह समितियों पर खाद की कुछ दिक्कत हुई थी। वहां खाद पहुंच गई है। लेकिन सचिवों के द्वारा जितनी खाद खरीदी जायेगी, उतनी ही बिक्री किसानों को होगी। अब कहीं दिक्कत नहीं है। सभी समितियों को खाद पहुंच गई है। अगर कहीं दिक्कत है तो बताएं। वहां भी खाद पहुंच जाएगी..,संजीव तिवारी एआर कोआपरेटिव।
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