69000 शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट जाएंगे अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थी, हाई कोर्ट के निर्णय पर कही यह बड़ी बात
लखनऊ, विचार। 69000 शिक्षक भर्ती में हाई कोर्ट के फैसले को अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। अनारक्षित छात्र मोर्चा के प्रदेश प्रभारी धर्मेंद्र मिश्र ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि 1994 की आरक्षण नियमावली सिर्फ एक सीधी भर्ती में लागू होनी चाहिए, जिसकी एक ही परीक्षा होती है।
अनारक्षित प्रतियोगी छात्र मोर्चा के प्रदेश महासचिव हिमांशु दुबे और नितेश सिंह ने बताया कि वह हाई कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं है, एक ही भर्ती जो कई चरणों में होती है उसमें हर स्तर पर आरक्षण का लाभ देने से आरक्षण का दायरा बढ़ जाता है। जिससे अनारक्षित अभ्यर्थियों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, यह टिप्पणी हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने हमारे पक्ष में फैसला देते हुए की थी, इसलिए हमें पूरा अधिकार है कि हम इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करें।
दरअसल,हाईकोर्ट ने 69000 अभ्यर्थियों की चयन सूची नए सिरे से बनाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2019 की 1 जून 2020 को जारी चयन सूची व 6800 अभ्यर्थियों की 5 जनवरी 2022 की चयन सूची को दरकिनार कर नए सिरे से चयन सूची बनाने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने इस सम्बंध में 13 मार्च 2023 के एकल पीठ के आदेश को संशोधित करते हुए, यह भी निर्णय दिया है कि सामान्य श्रेणी के लिए निर्धारित मेरिट में आने पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को सामान्य श्रेणी में ही माइग्रेट किया जाएगा।
न्यायालय ने यह भी कहा है कि हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार दिए जाने वाले ऊर्ध्वाधर आरक्षण का लाभ, क्षैतिज आरक्षण को भी देना होगा। इसके साथ ही न्यायालय ने इसी भर्ती परीक्षा के क्रम में आरक्षित वर्ग के अतिरिक्त 6800 अभ्यर्थियों की 5 जनवरी 2022 की चयन सूची को खारिज करने के एकल पीठ के निर्णय में कोई हस्तक्षेप न करते हुए, तीन माह में नई सूची जारी करने की कार्यवाही पूर्ण कर लेने को कहा है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि नई सूची तैयार करने के दौरान यदि वर्तमान में कार्यरत कोई अभ्यर्थी प्रभावित होता है तो उन्हें सत्र का लाभ दिया जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई पर असर न पड़े।
यह निर्णय न्यायमूर्ति एआर मसूदी व न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने महेंद्र पाल व अन्य समेत 90 विशेष अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया है। उक्त अपीलों में एकल पीठ के 13 मार्च 2023 के निर्णय को चुनौती दी गई थी जिसमें एकल पीठ ने 69000 अभ्यर्थियों की चयन सूची पर पुनर्विचार करने के साथ-साथ 6800 अभ्यर्थियों की 5 जनवरी 2022 की चयन सूची को खारिज कर दिया था।
क्या था एकल पीठ का आरक्षण के सम्बंध में निर्णय
एकल पीठ ने अपने निर्णय में कहा था कि टीईटी में आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी का कट ऑफ मार्क्स पाने पर अनारक्षित वर्ग में रखा जाना सही है क्योंकि टीईटी एक अभ्यर्थी को सिर्फ सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में भाग लेने के लिए उपयुक्त बनाता है। हालांकि एकल पीठ ने आगे कहा कि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों ने आरक्षण का लाभ लिया है, उन्हें अनारक्षित श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
खंडपीठ ने यह किया संशोधन
वहीं खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा है कि सामान्य श्रेणी के लिए निर्धारित मेरिट के मार्क्स लाने पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को सामान्य श्रेणी में ही माइग्रेट किया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा है कि हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार दिए जाने वाले ऊर्ध्वाधर आरक्षण का लाभ, क्षैतिज आरक्षण को भी देना होगा। न्यायालय ने आरक्षण के सम्बंध में आरक्षण अधिनियम की धारा 3(6) सर्विस रूल्स 1981 के अपेंडिक्स एक का नई सूची बनाते समय पूर्णतया पालन किया जाए।
आरक्षित वर्ग अमरेंद्र पटेल
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए लगातार आंदोलन कर रहे व कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे अमरेंद्र पटेल ने फैसला आने पर कहा था कि यह फैसला हम सभी के पक्ष में आया है। कोर्ट का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं कि हमें न्याय मिला है और साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि अब इस मामले में सरकार भी बिना किसी देर किए अभ्यर्थियों को न्याय देते हुए नौकरी दे।
मुख्यमंत्री ले सकते यह बड़ा फैसला
हाईकोर्ट के फैसले के बाद 69 हजार शिक्षकों की भर्ती मामले में रविवार को वाराणसी और अयोध्या से लौटकर मुख्यमंत्री बड़ा निर्णय ले सकते हैं। सूत्रों के अनुसार बेसिक शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव समेत शिक्षा विभाग, न्याय विभाग के शीर्ष अधिकारी और महाधिवक्ता बैठक में हिस्सा लेंगे। इसमें कोर्ट के आदेश के क्रम नई सूची बनाने से प्रभावित हो रहे अभ्यर्थियों पर भी स्पष्ट जानकारी आ सकती है।
सरकार हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी या नहीं, यह भी बैठक में महाधिवक्ता से राय के बाद तय होगा। उधर, छुट्टी के दिन शनिवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय खोलकर महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें नई सूची तैयार करने पर भी चर्चा की गई। नई सूची बनने से कितने पहले से नौकरी कर रहे युवा प्रभावित होंगे, यह भी देखा जा रहा है। साथ ही इस मामले में अब तक हुई कार्यवाही का ब्योरा भी जुटाया गया।
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