प्रयागराज:  HC ने गुप्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ताओं को लगाई फटकार

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ठेकेदारों और बिल्डरों पर अनुचित दबाव बनाने के लिए दाखिल जनहित याचिका पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने ऐसी प्रथा की निंदा की है, जिसमें अधिवक्ताओं द्वारा उच्च और निजी स्वार्थ के कारण शरीफ नागरिकों को फंसाने के लिए फर्जी जनहित याचिकाएं दाखिल की जाती हैं। ऐसे लोगों पर कठोर जुर्माना लगाने का निर्देश भी दिया गया है जो अनावश्यक विचारों और गुप्त उद्देश्यों के लिए ऐसी याचिकाएं दाखिल करते हैं। इस तरह की परेशान करने वाली कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे मामलों में शामिल लोगों पर कठोर जुर्माना लगाने की आवश्यकता है। 

उक्त आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय द्वारा दाखिल जनहित याचिका को खारिज करते हुए पारित किया। याचिका के माध्यम से कोर्ट को बताया गया कि एलएंडटी कंपनी द्वारा खनन विभाग से अनुमति लिए बिना और पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना मिट्टी की खुदाई की जा रही है। 

हालांकि राज्य की ओर से याचिका की स्थिरता को चुनौती देते हुए बताया गया कि परियोजना को 2021 में मंजूरी दी गई थी और मंजूरी के बाद ही मिट्टी की खुदाई हो रही है। सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान याची का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता ने स्वयं वर्ष 2022 में समान मामले में एक याचिका दाखिल की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। 

इस पर कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं से कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। स्पष्ट रूप से पूरी याचिका किसी इशारे पर दाखिल की गई है, जिससे अधिवक्ताओं के लिए चेंबर-सह-पार्किंग के निर्माण को रोका जा सके। अंत में कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याची पर 40 हजार का जुर्माना लगाया, लेकिन याची के अधिवक्ता द्वारा यह अनुरोध करने पर कि वह एक युवा अधिवक्ता है, जिसे केवल 2 साल का अनुभव है और लगाया गया जुर्माना उसके भविष्य के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बनेगा, कोर्ट ने अधिवक्ता को भविष्य में इस तरह की गतिविधि में शामिल न होने के निर्देश देने के साथ जुर्माना वापस ले लिया।

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