बरेली: डाक्टरों ने विशेषज्ञों से सीखीं हाथ व कलाई की जटिल सर्जरी
बीओए की ओर से दो दिवसीय कोर्स की रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में शुरुआत
बरेली, अमृत विचार। बरेली आर्थोपेडिक एसोसिएशन (बीओए) की ओर से जिले में पहली बार दो दिवसीय रिस्ट एंड हैंड (हाथ व कलाई) की जटिल सर्जरी सिखाने के लिए लाइव सर्जरी कोर्स का आयोजन शनिवार को बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सभागार में हुआ, जिसका उद्घाटन बिथरी चैनपुर विधायक डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने किया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं कोर्स ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. विनोद पागरानी ने बताया कि कार्यक्रम में 250 हड्डी के डॉक्टर प्रतिभाग कर रहे हैं, जो कि वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञों से हाथ व कलाई की जटिल सर्जरी की नवीन तकनीकी सीख रहे हैं। कोर्स में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हाथ एवं कलाई के वरिष्ठ सर्जनों में पुणे से डॉ. पंकज जिंदल, दिल्ली से डॉ. पीपी कोतवाल, गुरुग्राम से डॉ. विकास गुप्ता, कानपुर से डॉ. अजीत तिवारी आदि ने अपने अनुभव साझा किए। दो दिवसीय कोर्स में पहले दिन वरिष्ठ डॉक्टरों ने ओटी में लाइव सर्जरी की। इसको प्रोजेक्टर के माध्यम से सभागार में डॉक्टरों को दिखाया गया। बताया कि इस तरह के कोर्स से मेडिकल क्षेत्र में क्या नए अपडेट हो रहे हैं वो पता चलते रहते हैं। नई तकनीक एक दूसरे से साझा होती रहती है।
विशिष्ट अतिथि बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉ. केशव कुमार अग्रवाल, प्रति कुलाधिपति डॉ. अशोक अग्रवाल, रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. दिग्विजय सिंह, उत्तर प्रदेश आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. केडी त्रिपाठी, निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. पीयूष मिश्रा, सचिव डॉ. संतोष, कोषाध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल ,कोर्स को ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. मनोज हिरानी, ज्वाइंट ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. प्रवीण गर्ग, डॉ. रविन्द्र प्रताप सिंह, डॉ आर जी शर्मा, डॉ रवि मेहरा, डॉ. एस के कौशिक, डॉ. वी के खेतान, डॉ. अरविंद अग्रवाल, डॉ. आरके सिंह, डॉ. ओपी भास्कर, डॉ. रवि वार्ष्णेय, डॉ. जितेंद्र अग्रवाल, डॉ. उत्कल गुप्ता, डॉ. सुमित मेहरा आदि मौजूद रहे। संचालन वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमेंद्र महेश्वरी ने किया।
श्रमिकों को नहीं खोना पड़ेगा हाथ
कोर्स के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि फैक्ट्री में काम करते समय कई बार श्रमिकों के हाथ और कलाई में गंभीर चोट लग जाती हैं। उनके हाथ काटने की नौबत आ जाती है। ऐसी स्थिति में हाथ को कैसे बचाया जाए और उस हाथ को दोबारा कैसे काम लायक बनाया जाए, इस तकनीक पर उन्होंने व्याख्यान दिया। हाथ को जोड़ने के साथ दोबारा काम लायक बनाने की तकनीक के बारे में बताया।
अविकसित अंगूठे का भी विकास संभव
पुणे से आए अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ हड्डी रोग सर्जन डॉ. पंकज जिंदल ने बताया कि अगर किसी इंसान का जन्म से ही अंगूठा विकसित नहीं है तो सर्जरी के माध्यम से नसों को जोड़कर जटिल सर्जरी की जाती है जिससे अंगूठा विकसित कर दिया जाता है। बताया कि छोटे दर्द को भी नजर अंदाज न करें, तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। अनदेखी करने पर ये अंग को प्रभावित कर सकता है।
अंगुली कट जाए तो 6 घंटे से पहले पहुंचे डॉक्टर के पास
दिल्ली से आए वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पीपी कोतवाल ने बताया कि हादसे में अगर हाथ की अंगुली कट जाती है तो घबराएं नहीं। ऐसा होने पर 6 घंटे के अंतराल में मरीज को डॉक्टर के पास आना है। इस बात का ध्यान रखें कि अंगुली का जो हिस्सा कटकर अगल हो गया है, उसे फौरन बर्फ के संपर्क में रखें और डॉक्टर के पास पहुंच जाएं, सर्जरी के माध्यम से इसे दोबारा जोड़ा जा सकता है।
अधिक देर तक मोबाइल का उपयोग पैदा कर रहा सुन्नपन
कानपुर से आए वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अजीत तिवारी ने बताया कि अधिक देर तक मोबाइल और लेपटॉप का उपयोग करने से हाथों के सुन्नपन की शिकायत रहती है, इसे अनदेखा न करें, ऐसा लगातार होने से हाथों की नसें कमजोर होने लगती हैं, इसलिए तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। वहीं, स्पोर्ट्स इंजरी होने पर लगातार दर्द होने पर भी खिलाड़ी इसको नजर अंदाज करते हैं जो कि भविष्य में घातक हो सकता है, अंदरूनी संक्रमण होने से देरी से पता लगने पर हाथों का मूवमेंट प्रभावित हो सकता है।
