अमेठी: शांतिपूर्ण ढंग से हुआ मूर्ति विसर्जन, पुलिस-प्रशासन रहा सतर्क
शुकुल बाजार/अमेठी। रेछ घाट पर भक्तों ने उत्साह पूर्वक शारदीय नवरात्र पर स्थापित मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया। इस दौरान किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सतर्क नजर आए। विसर्जन के दौरान पुलिस और राजस्व टीम मौजूद रही। इसके अलावा घाट पर गोताखोर, रस्सा, नाव आदि सुविधाएं मौजूद …
शुकुल बाजार/अमेठी। रेछ घाट पर भक्तों ने उत्साह पूर्वक शारदीय नवरात्र पर स्थापित मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया। इस दौरान किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सतर्क नजर आए। विसर्जन के दौरान पुलिस और राजस्व टीम मौजूद रही। इसके अलावा घाट पर गोताखोर, रस्सा, नाव आदि सुविधाएं मौजूद रहीं। बताते चलें इस बार कोविड-19 के चलते सार्वजनिक मूर्तियों की स्थापना एवं सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हो सके।
जल में क्यों किया जाता है मूर्ति विसर्जन ?
समस्त संसार को पंचतत्वों से बना हुआ माना जाता है शास्त्रों में कहा भी गया है- क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा पंच तत्व ये अधम शरीरा। यानि कि शरीर आकाश, जल, अग्नि और वायु से मिलकर बना है। जल भी पंचतत्व है इसे काफी पवित्र माना गया है। क्योंकि यह हर गुण दोष को अपने आप में विलय कर लेता है पूजा में भी पवित्र जल से पवित्रीकरण किया जाता है। हिंदू पुराणों में जल को ब्रह्म माना गया है।
यह भी माना गया है कि सृष्टि की शुरुआत से पहले और इसके अंत के बाद संपूर्ण सृष्टि में सिर्फ जल ही जल होगा। जल को आरंभ, मध्य और अंत बताया गया है। यह चिर तत्व है इसी वजह से जल में त्रिदेवों का वास भी माना जाता है। यही वजह है कि पूजा पाठ में भी पवित्रीकरण के लिए जल का प्रयोग किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जल में देव प्रतिमाओं को विसर्जित करने के पीछे यह कारण है कि देवी देवताओं की मूर्ति भले ही विलीन हो जाए लेकिन उनके प्राण मूर्ति से निकलकर सीधे परम ब्रह्म में लीन हो जाते हैं।
