मुरादाबाद: बेसिक शिक्षा विभाग के यूनीफार्म ठेके में शर्त की अनदेखी
मुरादाबाद,अमृत विचार। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए जारी किए गए निशुल्क स्वेटर का ठेका शर्त की अनदेखी करके दिया गया है। ठेका के लिए 38 फर्मों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। जिसमें ऐसी फर्म को टेंडर दे दिया गई है जिसे इस कार्य का सही अनुभव नहीं है। मानक …
मुरादाबाद,अमृत विचार। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए जारी किए गए निशुल्क स्वेटर का ठेका शर्त की अनदेखी करके दिया गया है। ठेका के लिए 38 फर्मों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। जिसमें ऐसी फर्म को टेंडर दे दिया गई है जिसे इस कार्य का सही अनुभव नहीं है। मानक पूरी न करने वाली फर्म को ठेका देने के मामले में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। डीएम से फर्म की जांच कराने की मांग की गई है।
ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में यह ताजा मामला बेसिक शिक्षा विभाग के स्वेटर टेंडर को लेकर चर्चा में आया है। दरअसल बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए जेम पोर्टल पर 7 सितंबर को टेंडर का प्रकाशन किया गया। 20 सितंबर तक सभी प्रक्रिया पूर्ण की जानी थी। इसके लिए 38 फर्मो ने आवदेन किया। जिसके बाद मानक पूरे न करने वाली 30 फर्मों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। शेष आठ फर्मों के मानको की जांच की गई। जिसमें अंतिम तीन फर्मों में बौद्ध राज सुभाष चंद्र एसोसिएट्स, नारांग ट्रेडस और सुरज हॉजरी मिल्स को क्रमश: एल-एक, एल-दो व एल-तीन श्रेणी के लिए चयनित किया गया।
तीनों फर्मो में से एल-1 यानी बौद्ध राज सुभाष चंद्र एसोसिएट्स को ठेका जारी किया गया है। लेकिन, इस फर्म को स्वेटर बनाने का अनुभव नहीं है। जबकि टेंडर के मानकों के अनुसार तीन साल से अधिक का अनुभव फर्म को होना चाहिए। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों की ओर से इस फर्म को ठेका जारी कर दिया गया है। जिसके चलते अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
डेढ़ लाख से अधिक बच्चों को मिलने हैं स्वेटर
मंडल में 1,66,862 बच्चों को निशुल्क वितरित किए जाने हैं। जिसमें नगर के 8640 बच्चें शामिल हैं। जबकि शेष बच्चे भगतपुर, बिलारी, छजलैट, डिलारी, कुंदरकी, मूंढापांडे, ठाकुराद्वारा के हैं। 31 अक्टूबर से स्वेटर का वितरण किया जाना है।
डीएम से की जांच की मांग
मानकों की अनदेखी के ठेके को लेकर राहुल कुमार ने जिलाधिकारी से जांच की मांग की है। शिकायती पत्र में कहा कि जेम पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के बावजूद अनुभवहीन फर्म को ठेका दिया जाना जांच का विषय है। यह फर्म निविदा की नियम व शर्तों को पूरा नहीं करता, इसके बावजूद ठेका कैसे दिया गया।
योगेन्द्र कुमार, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी
जेम पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के बाद ही उक्त फर्म को टेंडर जारी किया गया है। यदि किसी फर्म को आपत्ति है तो वह शिकायत कर सकता है। लेकिन, ऑनलाइन प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की जा सकती।
राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी
जेम पोर्टल सरकार का है। इसके किसी दूसरे का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। टेंडर और ठेका नियमानुसार हुआ है। इस फर्म को रामपुर और संभल जिले का भी ठेका मिला है। कुछ दिन पहले इस ठेके का टेक्निकल बिड खुला था। अगर ठेके में कई फर्में पात्र होती हैं तो किसी को बाहर नहीं किया जा सकता है।
