Kanpur: पूछ रहे पितर, बेटा कब करोगे मेरा अस्थि विसर्जन...अस्थि बैंक में कलश रखकर अपने ही भूल गए गंगा में बहाना  

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। हिंदू धर्म में मृतक की अस्थियों के विसर्जन का बड़ा महत्व है। मान्यता है कि गंगा नदी में अस्थि विसर्जन से आत्मा को मोक्ष मिलता है। लेकिन शहर में तमाम ऐसे लोग हैं, जो प्रियजनों की अस्थियों का कलश बैंक में रखकर विसर्जन करना भूल गए हैं। ऐसी अस्थियों के विसर्जन का बीड़ा युग दधीचि देहदान संस्था ने उठा रखा है।   

प्रदेश का पहला अस्थि कलश बैंक शहर में स्थापित है। यहां परिजनों की इच्छा पर मृतकों की अस्थियां कलश में रखी जाती हैं, ताकि बाद में वह इन्हें गंगा में विसर्जित कर सकें। लेकिन तमाम लोग बैंक में अस्थि कलश रखने के बाद दोबारा नहीं आते हैं। परिजनों के इंतजार में अस्थियां कई-कई माह रखी रहती हैं। वर्तमान में भैरोघाट, ड्योढ़ी घाट सलेमपुर और बिठूर स्थित श्मशान घाट पर स्थापित बैंकों में 9 अस्थि कलश काफी समय से रखे हैं।  

10 वर्ष पूर्व हुई थी अस्थि कलश बैंक की स्थापना 

भैरोघाट पर नि:शुल्क अस्थि कलश बैंक की स्थापना देहदान व नेत्रदान अभियान के प्रमुख मनोज सेंगर ने समन्वय सेवा समिति के संयोजक स्व. संतोष अग्रवाल के सहयोग से वर्ष 2014 में की थी। इसे युग दधीचि देहदान संस्थान संचालित करता है। ये बैंक अंत्येष्टि क्रिया करने वाले उन लोगों के लिए मददगार है, जो किसी कारणवश तत्काल मृतक की अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पाते हैं। वर्ष 2020 में ड्योढ़ी घाट, सलेमपुर और बिठूर स्थित श्मशान घाट पर भी अस्थि कलश बैंक की स्थापना हुई थी। बैंक में अस्थि कलश रखने वालों को एक टोकन दिया जाता है, जिसे देखकर अस्थि कलश लौटाया जाता है। यह व्यवस्था नि:शुल्क है। 

नवंबर में लंबे समय से रखी अस्थियों का होगा भू-विसर्जन 

युग दधीचि देहदान अभियान के प्रमुख व अस्थि कलश बैंक के संस्थापक मनोज सेंगर ने बताया कि बैंक में कुछ अस्थियां लंबे समय से रखी हैं। इनका भू विसर्जन नवंबर माह में अस्थि कलश बैंक की 10वीं वर्षगांठ पर किया जाएगा। अब तक 100 से अधिक अस्थि कलशों का भू विसर्जन किया जा चुका है।

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