लखीमपुर खीरी: बाघ के आतंक से निपटने को अब थर्मल ड्रोन कैमरों से होगी कांबिंग

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Edited By Pradeep Kumar
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महेशपुर रेंज के आंवला और बिलहरी गांवों में है बाघ की चहलकदमी से दहशत

लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। महेशपुर रेंज की आंवला और बिलहरी बीट के गांवों में तीन सप्ताह से बाघ की चहलकदमी से ग्रामीणों में भय बना हुआ है। बाघ लगातार लोकेशन बदल रहा है, जिस कारण रेस्क्यू टीम को निराशा हाथ लगी है। तीन हफ्ते से अधिक का समय होने तक कामयाबी हासिल न होने से वन विभाग ने थर्मल ड्रोन का प्रयोग करने का फैसला लेकर कोलकाता से थर्मल ड्रोन किराये पर मंगाकर बाघ प्रभावित क्षेत्र में लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया है।

प्रभागीय वनाधिकारी संजय विश्वाल के दिशा निर्देश पर वन क्षेत्राधिकारी  नरेशपाल सिंह, डिप्टी रेंजर रामनरेश वर्मा, सुरेंद्रपाल गौतम की अगुवाई में ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ दयाशंकर और डॉ नितेश कटियार ने बाघ प्रभावित पांच किलोमीटर एरिया में थर्मल ड्रोन से निरीक्षण की योजना बनाई है। थर्मल कैमरे में तीन तरह के कैमरा लगे होते हैं, जिसमें पहला कैमरा वाइड कैमरा जो फैले एरिया को कैप्चर करता है, दूसरा जूम कैमरा है जो छोटी से छोटी चीजों को स्पष्ट रूप से दिखायेगा। तीसरा कैमरा थर्मल कैमरा है जो किसी की भी बॉडी की ऊष्मा से पहचान कर फुटेज भेजता है।

बहराइच के खूंखा भेड़िए भी थर्मल कैमरों से पकड़े
वनाधिकारी ने ट्रेंकुलाइज टीम को कामयाबी न मिलने पर कोलकाता से पिक्सरूट टेक्निकल प्राइवेट लिमिटेड से थर्मल ड्रोन को किराए पर मंगाया है। ड्रोन के साथ आए आपरेटर सोहन दत्ता ने बताया कि इस ड्रोन का प्रयोग बहराइच में खूंखार भेड़ियों के रेस्क्यू ऑपरेशन में लगभग एक महीने तक किया गया। इससे पहले इस ड्रोन का उपयोग नानपारा और बलरामपुर में तेंदुए के रेस्क्यू में लगाया जा चुका है।

गन्ने की फसल बाघ को पकड़ने में बनी रोड़ा
ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ दयाशंकर ने बताया कि बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के लिए बाघ को निश्चित दायरे में होना जरूरी होता है। गन्ने की फसल के चलते ट्रैकुलाइज करना मुश्किल हो रहा है। मूड़ा अस्सी में काम्बिग के दौरान ट्रेंकुलाइज वैन, कांम्बिग ट्रैक्टर की मदद से वनरेंज के कर्मचारी ट्रेंकुलाइज टीम का सहयोग करते हैं।

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