बरेली: स्वदेशी अपनाओ मुहिम से रोशन हुई कुम्हारों की दीपावली

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। लाकडाउन में सहालगों पर ग्रहण के साथ अन्य व्यापारिक गतिविधियों पूरी तरह बंद होने के कारण प्राचीन कला, परंपरा और सभ्यता को अपने हुनर से जिंदा रखने वाले कुम्हारों की भी कमर टूट गई थी। इन सबके बीच एक बार फिर दीपावली पर उनको संजीवनी मिलने की उम्मीद है। बताया जाता है …

बरेली, अमृत विचार। लाकडाउन में सहालगों पर ग्रहण के साथ अन्य व्यापारिक गतिविधियों पूरी तरह बंद होने के कारण प्राचीन कला, परंपरा और सभ्यता को अपने हुनर से जिंदा रखने वाले कुम्हारों की भी कमर टूट गई थी। इन सबके बीच एक बार फिर दीपावली पर उनको संजीवनी मिलने की उम्मीद है। बताया जाता है कि भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा को लेकर चल रहे गतिरोध के कारण लोग चाइनीज झालरों से मुंह मोड़ने लगे हैं।


इधर, सरकार भी चीन निर्मित उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील कर रही है। ऐसे में अब लोगों का जोर दीपों के त्योहार पर मिट्टी के बने दीयों से अंधियारा दूर करने को लेकर है। इससे मिट्टी के दीये व अन्य वर्तन बनाने का कुम्हारों की उम्मीदें जगी हैं। उनका कहना है दशहरा से पहले व्यापारियों से दीपावली को लेकर बड़ी संख्या में दीये बनाने के आर्डर मिल गये थे।

इसके अलावा कई तरह के मिट्टी के खिलौने भी तैयार किए जा रहे हैं। वहीं, इस दीपावली को लेकर स्वदेशी अपनाओ मुहिम का असर सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रहा है। इसलिए माना जा रहा है इस बार चाइनीज झालरों का नहीं दीपों का त्योहार मिट्टी के दीयों से बनेगा।

मिट्टी के दीये की मांग पिछले वर्ष से अधिक है। दशहरा से पहले ही दीयों के आर्डर मिल गए थे। विभिन्न आकृति में बनाए गए आकर्षक दीपक लोगों को लुभा रहे हैं। कुम्हार मिट्टी के बनाए सभी सामानों की रंगरोगन सहित अन्य तरह के सजावट में जुटे हैं। इतना ही नहीं दीये के साथ वे मिट्टी के खिलौने भी बना रहे हैं। -आकाश

पिछले कुछ वर्षों से बाजार में इलेक्ट्रिक झालरों के कारण मिट्टी के दीये की मांग कम हुई थी लेकिन इस बार श्रद्धालुओं ने फिर से माता लक्ष्मी के पूजन और छत-आंगन में मिट्टी के दीपक जलाने का मन बनाया है। पर्व में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में दीपकों के साथ खिलौने और अन्य सजावट के सामान भी तेजी से बना रहे हैं। – वीरपाल

चाइनीज झालरों का रखा पुराना स्टाक दुकानों पर खत्म होने की वजह से इस बार दीयों की बिक्री को लेकर कुम्हारों की आस बढ़ गई है। दशहरा खत्म होते ही कुम्हार दीवाली की तैयारी में जुट गए थे। इस वर्ष लोग स्वदेशी अपनाने पर जोर दे रहे हैं। इसलिए चीन की इलेक्ट्रोनिक झालर की खरीदारी इस बार न के बराबर होगी। – पवन प्रजापति

यह बात बिल्कुल सही है कि शास्त्रों में मिट्टी के दीये को शुद्ध बताया गया है। दीपावली में मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा है। इससे धन की देवी लक्ष्मी का वास होता है। घर में सुख समृद्धि आती है। मिट्टी के बर्तनों से पूजा-अर्चना करने से देवी देवता प्रसन्न होते हैं। -आचार्य महेश शास्त्री

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