बरेली: चिप्स-कुरकुरे के रैपर से बनेगी ईको ब्रिक्स, स्वयंसेवक संवारेंगे पार्क

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विश्वदीपक त्रिपाठी, बरेली। हम सभी पानी, कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतल, चिप्स-कुरकुरे के रैपर आदि सड़कों और कूड़ेदान में फेंक देते हैं। सख्ती के बाद भी पॉलीथिन का उपयोग करना पूरी तरह से बंद नहीं हो पा रहा है। इसके कारण पर्यावरण की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। सबसे गंभीर बात तो …


विश्वदीपक त्रिपाठी, बरेली। हम सभी पानी, कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतल, चिप्स-कुरकुरे के रैपर आदि सड़कों और कूड़ेदान में फेंक देते हैं। सख्ती के बाद भी पॉलीथिन का उपयोग करना पूरी तरह से बंद नहीं हो पा रहा है। इसके कारण पर्यावरण की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। सबसे गंभीर बात तो यह है कि प्लास्टिक को नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लग जाते है। इसके कारण प्रदूषण एक बड़ी समस्या का रूप ले रहा है।

ऐसे में रसोई घर के प्लास्टिक कचरे के निस्तारण का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण गतिविधि विभाग ने एक नायाब तरीका निकाला है। इसे ईको-ब्रिक्स में तब्दील कर शहर के पार्कों को संवारा जाएगा। इसके लिए 100 स्वयंसेवक परिवारों ने आगे कदम बढ़ाया है। अभियान के तहत सबसे पहले शहर के वीर सावरकर नगर के एक पार्क में प्लास्टिक के कचरे से निर्मित बेंच, स्टूल आदि लगाए जाएंगे। ईको ब्रिक बनाने के लिए प्लास्टिक की खाली बोतलों को महानगर के 100 परिवारों को दिया गया है। संघ के 12 महानगरों में 120 बस्तियों तक पर्यावरण विभाग की संरचना की गई है।

इसकी शुरुआत सबसे पहले छोटे पालीथिन यानि रसोई से निकलने वाले प्लास्टिक और बच्चों के खाने-पीने के सामनों के रैपर से की जाएगी। एक माह तक इन्हें बोतलों में वेस्ट के रूप में जुटाया जाएगा। इसके बाद एक ठोस उत्पाद तैयार किया जाएगा जो काफी मजबूत होता है। इन्हें ईंटों की जगह भी इस्तेमाल करने लायक बनाने की योजना बन रही है। इससे निर्मित सामानों का उपयोग किया जाएगा। इससे फायदा यह होगा कि प्लास्टिक के कचरे का उपयोग हो जाएगा। जो पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित होगा।

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