बरेली: आस्था का दरबार सजाने को मिट्टी के दीपक तैयार

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बरेली,अमृत विचार। आस्था के दरबार पर आधुनिकता का बाजार पूरी तरह हावी नहीं हो सका है। परंपराएं सिमटी जरूर हैं मगर खत्म नहीं हुई हैं। यही वजह है कि आज भी मिट्टी के दीयों का महत्व कम नहीं हुआ है। घरों को सजाने के लिए भले ही इलेक्ट्रॉनिक सामान का प्रयोग व्यापक पैमाने पर किया …

बरेली,अमृत विचार। आस्था के दरबार पर आधुनिकता का बाजार पूरी तरह हावी नहीं हो सका है। परंपराएं सिमटी जरूर हैं मगर खत्म नहीं हुई हैं। यही वजह है कि आज भी मिट्टी के दीयों का महत्व कम नहीं हुआ है। घरों को सजाने के लिए भले ही इलेक्ट्रॉनिक सामान का प्रयोग व्यापक पैमाने पर किया जा रहा हो लेकिन मंदिर में तो मिट्टी के दीप ही रोशन हो रहे हैं।

करवाचौथ हो या अहोई अष्टमी, दीपावली हो अथवा कोई अन्य त्योहार, कुम्हारों के चाक और बर्तनों के बिना पूरे नहीं होते। कुम्हार के चाक से बने दीये ही हैं जिनके बिना दीपावली की पूजा पूरी नहीं होती। शनिवार को दीपावली है। ऐसे में कुम्हारों के चाक ने गति पकड़ ली है। मिट्टी के दीपक बनाने का काम तेज कर दिया है।

पांच तत्वों से मिलकर बनता है मिट्टी का दीपक
मिट्टी का दीपक पांच तत्वों से मिलकर बनता है जिसकी तुलना मानव शरीर से की जाती है। पानी, आग, मिट्टी, हवा तथा आकाश तत्व ही मनुष्य व मिट्टी के दीपक में मौजूद होते हैं। दीप प्रज्ज्वलित करने से ही समस्त धार्मिक कार्य संपन्न होते हैं। दीपावली के शुभ अवसर पर मिट्टी के दीपों का बेहद महत्व है। वास्तुशास्त्र में इसका महत्व इस बात से है कि यदि घर में अखंड दीप जलाने की व्यवस्था की जाए तो वास्तु दोष समाप्त होता है।

50-60 रुपये सैकड़ा है कीमत
इन दिनों कुम्हार बिक्री के लिए अलग-अलग वैरायटी के दीपक तैयार करने में लगे हुए हैं। कुम्हारों के अनुसार, थोक में 50 रुपये सैकड़ा में दीये बेचे जाते हैं। बाजार में ग्राहकों को 10 रुपये में एक दर्जन दीये मिलते हैं। बताते हैं कि दीया बनाना ही परेशानी का सबब नहीं बल्कि बिक्री करने में भी काफी दिक्कतें होती हैं। दुख तो तब और ज्यादा होता है कि अच्छे घरों के लोग इतनी कम कीमत के बाद भी मोल भाव करते हैं।

चाइनीज लड़ियों को टक्कर दे रहे दीये
पुरानी यादों में खोकर वीरपाल ने बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब मिट्टी के दीयों की जगह चाइनीज लड़ियों ने ले ली थी लेकिन अब फिर मिट्टी के दीयों का दौर लौट आया है। वे बताते है कि दीयों की वैरायटी भी इतनी है कि ग्राहक खरीदने से पहले कंफ्यूज हो रहे हैं। बाजारों में इस बार की स्थिति देखकर यह अंदाजा तो लगाया जा सकता है कि चीनी वस्तुओं की अनदेखी हो रही है। ग्राहक चीनी दीये लेने की बजाय मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं। बाजार में आ रही चाइनीज लड़ियों से टक्कर लेने के लिए मिट्टी के दीपक तैयार हो रहे हैं।

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