पीलीभीत: आंखों में आंसू दिल में दर्द, पन्नी के नीचे जीवन की लड़ाई...आखिर कब पूरी होगी आवास की आस!
वैभव शुक्ला, पीलीभीत। आवास की जरूरत हर किसी को है। इसके लिए शासन स्तर से तमाम योजनाएं भी संचालित की जा रही है। जिसका लाभ भी जरूरतमंदों को मिल रहा है। खुले आसमां के नीचे गुजर बसर करने वाले तमाम परिवारों को लाभान्वित कर छत (मकान) मुहैया कराए जा चुके हैं। मगर, अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनकी आंखों में आंसू, दिल में दर्द, आवास की तलाश है। मगर, उनकी ये आस अभी भी अधूरी सी है।
बुजुर्ग, विधवा, दिव्यांग कई जरूरत मंदों का आलम ये है कि पन्नी के नीचे जीवन की लड़ाई सी चल रही है। उनके चेहरे पर कई बार प्रयास करने के बाद भी आवास न मिलने की पीड़ा साफ छलक रही है। उनकी ही मानें तो तीन-तीन बार आवेदन हो चुका है। अशिक्षित और जानकारी के अभाव में वह कई बार इसके लिए जिम्मेदारों को खर्च भी दे चुके हैं, लेकिन जब भी आवास मिलने का वक्त आया तो सिर्फ अगली बार आस पूरी होने का आश्वासन दे दिया गया।
हालात ये हैं कि उनके दर्द को सुनने वाला ही कोई नहीं। कई तो जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। तमाम योजनाओं और लाभान्वितों के लंबे-चौड़े आंकड़ों के बाद वह खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। ऐसे ही कई परिवार शहर से सटी नगर पंचायत नौगवां पकड़िया में लंबे से सर्दी, गर्मी, बरसात...हर मौसम में चुनौतियों से भरा जीवन गुजारने को मजबूर हैं। जब उनके संपर्क किया तो उनकी पीड़ा जुबां से अधिक आंख से छलकते आंसुओं से अधिक बयां हो गई। परिवार की आर्थिक कमजोर स्थिति और जरूरतों का हवाला देते हुए सिर्फ आवास की आस लगाए हुए हैं। पात्र दिखाई देने के बाद भी वह लाभान्वित क्यों नहीं हुए...इसका जवाब तो उनके पास भी नहीं है।
केस एक: सोनिया बोलीं- तीन बार कर चुके आवेदन
नगर पंचायत नौगवां पकड़िया में रहने वाली सोनिया का परिवार पन्नी डालकर गुजर बसर कर रहा है। उन्होंने बताया कि पति नईम की करीब 19 साल पहले मौत हो चुकी है। परिवार में दो पुत्र मोहसिन, शोमीन और एक पुत्री सुहानी है। बड़ा बेटा मजदूरी करता है, जबकि शोमीन कई सालों से बीमार चल रहा है। घर में जवान बेटी है, लेकिन आवास न होने से बिटिया की चिंता भी सताई रहती है। तीन बार आवेदन कर चुके हैं, लेकिन आवास न मिला। इस बार भी आवेदन के लिए कागजात दिए हैं। उनसे जब ये पूछा गया कि क्या उनका या बच्चों का अलग से भी कोई आवास है। इस पर उन्होंने साफ इन्कार कर दिया। बोलीं- पति के भाईयों और ससुर के अलग आवास हैं, लेकिन उनका परिवार तो कई दशक से अलग ही रह रहा है।
केस दो: नाजरीन बोलीं- नहीं दे सके दो हजार, इसलिए कटा था आवास
नौगवां पकड़िया में ही रहने वाली नाजरीन भी आवास के इंतजार में सालों से हैं। उन्होंन बताया कि परिवार में चार बच्चे सिम्मी, सोहेल, समीर और अनस है। अनस पिछले नौ साल से चल फिर नहीं सकता है। बीमार चल रहा है। तीसरी बार अब फिर से आवास के लिए आवेदन को कागजात दिए हैं। उनका ये भी कहना था कि एक बार तो दो हजार रुपये मांगे गए थे। मगर उस वक्त आर्थिक तंगी अधिक होने पर दे नहीं सकी थी। इसलिए फार्म ही शायद उस वक्त जमा नहीं किया गया। ये कह दिया कि आवास से नाम कट गया है।
केस तीन: इंतजार करते-करते लाभार्थी की चली गई जान, आवास अब तक नहीं
नगर पंचायत नौगवां पकड़िया के ही रहने वाले सलीम का परिवार भी किसी तरह छप्पर डालकर पन्नी के नीचे गुजर बसर कर रहा है। उनका कहना है कि काफी दिक्कत होती है। ये भी बताया कि जब नगर पंचायत नौगवां पकड़िया ग्राम पंचायत हुआ करती थी, उसी वक्त पत्नी खुशनुमा के नाम पर आवास आ गया था। मगर, वह मिल नहीं सका। पत्नी की करीब डेढ़ साल पहले मौत हो चुकी है। अब बताया गया है कि आवास पत्नी के बजाए उनके नाम पर स्थानांतरित होगा, तब लाभ मिलेगा। ये भी बताया कि इसके लिए कुछ दिन पहले टीम भी सर्वे करने के लिए आई थी। अभी फिलहाल इंतजार ही चल रहा है। इसके अलावा नजदीक की ही नसरीन और मोहम्मद आमीन के परिवार को भी आवास की आस पूरी नहीं हो सकी है।
केस चार: पेंशन, न ही मिला आवास...वृद्धा को अभी भी आस
नौगवां पकड़िया के वार्ड नंबर 12 की रहने वाली वृद्धा अख्तरी बेगम भी आवास की आस लगाए हुए हैं। परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। पन्नी डले छप्पर के नीचे गुजर बसर कर रही हैं। उनके चार पुत्री है। वह अलग रहती है। जब उनसे वार्ता की गई तो उनकी आंख से आंसू छलक उठे। फिर आवास न मिलने की पीड़िता भी खुलकर बयां की। कहा कि अभी तक वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं है, न ही आवास की सुविधा। अब सर्दी के दिनों में और मुसीबत होगी। वहीं, पड़ोस में ही पन्नी डालकर रहने वाली दिव्यांग शबाना भी हैं। उनका दुखड़ा भी इससे कम नहीं था।
...तो अभी और करना होगा इंतजार
आवास की लगाए जरूरतमंदों को अभी फिलहाल और इंतजार करना पड़ सकता है। प्रभारी परियोजना अधिकारी/एसडीएम सदर महिपाल सिंह का कहना है कि नगर पंचायत नौगवां पकड़िया का इलाका शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। शहरी क्षेत्र के लिए फिलहाल अभी कोई नई आवास योजना नहीं आई है। मात्र पूर्व में आवंटित आवासों का ही निर्माण कराया जा रहा है। वर्तमान ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी आवास योजना चल रही है।
