कासगंज: मोहिनी हत्याकांड...अब चार्जशीट पर टिकीं सबकी निगाहें

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Edited By Amrit Vichar
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चार्जशीट में क्या बनाया जाएगा आधार? अधिवक्ता भी कर रहे तरह-तरह की चर्चा 

कासगंज, अमृत विचार। महिला अधिवक्ता मोहनी हत्याकांड के मामले में चार्जशीट दाखिल करने का समय नजदीक आ गया है। मात्र तीन दिन शेष बचे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें चार्जशीट पर टिकी हुई हैं। अब इस चार्जशीट में पुलिस क्या आधार बनाएगी इसको लेकर अधिवक्ताओं में तरह तरह की चर्चाएं हैं। जो भी हो, लेकिन पुलिस का सिर दर्द अभी कम नहीं हुआ है। इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी सहित दो आरोपी अभी फरार चल रहे हैं। पुलिस की पकड़ से काफी दूर हैं।

बीती तीन सितंबर को जिला न्यायालय के मुख्य द्वार से महिला अधिवक्ता मोहनी लापता हो गई। चार सितंबर की शाम को उनका शव गोरहा नहर के गांव रजपुरा के समीप मिला। शव की शिनाख्त मोहिनी के परिजनों ने की। उसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन शिनाख्त को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे और इन सवालों के बीच महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र भी लटक गया। फिर क्या था पुलिस ने शव का डीएनए मोहिनी की मां से मिलान कराया। रिपोर्ट तेलंगाना भेजी गई। काफी दिन तक यह रिपोर्ट नहीं आई तो मामला अमृत विचार ने प्राथमिकता के साथ लोगों के बीच पहुंचाया। उसके बाद प्रयास किए गए तो डीएनए रिपोर्ट पुलिस को मिल गई। तब पुलिस ने दावा किया कि डीएनए रिपोर्ट परिवार के लोगों को भी दी जाएगी, लेकिन अब तक रिपोर्ट परिवार के लोगों को नहीं दी गई है। इधर रिपोर्ट आने के बाद भी मोहिनी का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है। इसको लेकर मोहिनी का पति ब्रिजतेन्द्र तोमर बेहद परेशान दिखाई दे रहा है। वहीं चार दिसंबर को 90 दिन पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में चार्जशीट दाखिल करने की निर्धारित तिथि नजदीक आ गई है। पुलिस को 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल करनी होती है। इस हत्या में पांच अधिवक्ता और एक विधि छात्र एवं एक महिला, पुरुष जेल भेजे जा चुके हैं। जबकि मुख्य आरोपी सुनील फौजी और उसका सहयोगी रजत सोलंकी अभी फरार है। चार्जशीट दाखिल करने में पुलिस क्या आधार बनाएगी इसको लेकर चर्चाएं हो रही हैं। यह मामला फिर से लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।


संतुष्ट नहीं परिजन और आरोपी
पुलिस की विवेचना से आरोपी अधिवक्ता और महिला अधिवक्ता के परिजन संतुष्ट नहीं हैं। पुलिस किसी भी पक्ष को संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रही है। असंतोष जाहिर करने पर न्यायालय ने विवेचना बदलने की संस्तुति भी की। हालांकि, अभी विवेचना नहीं बदली जा सकी है।

अधिवक्ता के पति को नहीं मिली रिपोर्ट
महिला अधिवक्ता के पति ब्रिजतेन्द्र तोमर ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट मुझे नहीं मिली है। रिपोर्ट आ चुकी है फिर भी मेरी पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा मुझे हर पल डर सताता रहता है, क्योंकि अभी दो हत्यारोपी फरार हैं। 

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