लखीमपुर से पश्चिम बंगाल जा रही डीसीएम से 22 गोवंश बरामद, एक गिरफ्तार...दो साथी फरार 

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Edited By Amrit Vichar
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लखीमपुर खीरी/खमरिया, अमृत विचार: गोवंशीय पशुओं को भरकर पश्चिम बंगाल जा रही एक डीसीएम को गौरक्षकों की सूचना पर खमरिया पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस ने मौके से पश्चिम बंगाल के रहने वाले गो तस्कर को गिरफ्तार किया है, जबकि डीसीएम चालक व दो तस्कर भागने में सफल रहे हैं। डीसीएम से 22 पशु बरामद हुए हैं। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार चालक का चालान भेजा है। वह पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। 

शुक्रवार की रात कुछ लोग शंकरपुर थाना ईसानगर के गांव शंकरपुर में छुट्टा घूम रहे पशुओं को पकड़कर डीसीएम में लाद रहे थे। ग्रामीणों ने इसकी सूचना गौरक्षक रिंकू पांडेय व शिवम पांडेय को दी। गोरक्षकों ने खमरिया प्रभारी निरीक्षक विवेक उपाध्याय को मामले की जानकारी दी। इस पर पुलिस सक्रिय हो गई। खमरिया पुलिस ने ईसानगर एसओ देवेंद्र कुमार और गौरक्षकों के साथ डीसीएम की घेराबंदी की। 

पुलिस ने खमरिया थाना क्षेत्र के दरिगापुर चौराहे के पास डीसीएम को पकड़ लिया। रात के अंधेरे का फायदा उठा डीसीएम चालक सहित दो तस्कर तो मौके से भाग निकले, लेकिन पुलिस ने भाग रहे गोतस्कर नूर इस्लाम पुत्र करीमुलहक निवासी इटहर जिला उत्तरी नीनाजपुर पश्चिम बंगाल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने डीसीएम पर पड़ा त्रिपाल हटवाया तो उसमें 22 गोवंश बरामद हुए। 

फरार आरोपियों में एक गो तस्कर थाना ईसानगर के गांव शंकरपुर का रहने वाला है। प्रभारी निरीक्षक विवेक कुमार उपाध्याय ने बताया गोरक्षकों की सूचना पर 22 गोवंश से भरी पंजाब नंबर की डीसीएम पकड़ी गयी है, एक गोतस्कर को गिरफ्तार किया गया है। चालक सहित दो अन्य आरोपी मौके से भाग निकले। जिनकी तलाश की जा रही है। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि गोवंशीय पशुओं को दूसरे राज्यों में ले जाकर वध किया जाता है और मांस की बिक्री की जाती है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अंधेरे का लाभ उठाकर अक्सर भाग जाते हैं आरोपी
ऐसा अक्सर होता है कि जब पुलिस कोई अच्छा गुडवर्क दिखाती है तो उसमें इक्का-दुक्का लोग ही पकड़े जाते हैं और पुलिस यह कहती है कि अंधेरा का लाभ उठाकर इतने बदमाश या अपराधी भाग निकले। ऐसा ही गोवंशीय पशुओं के बरामद होने के मामले में भी सामने आया है। दो थानों की पुलिस की घेराबंदी के बाद भी दो तस्कर भाग निकले। इस मामले में भी पुलिस का दावा है कि दोनों अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकले। अक्सर इस तरह से आरोपियों के भागने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी उठ रहे हैं।

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